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Mathura News: दाऊजी महाराज ने ओढ़ी रजाई, समझो सर्दी आई...

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श्री दाऊजी महाराज के गद्दल में दर्शन। 
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राजेश पाठक
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बलदेव। ब्रज के राजा श्रीदाऊजी महाराज का 445वां प्राकट्योत्सव आज हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। इसी के साथ दाऊजी का लक्खी मेला शुरू हो जाएगा, जो एक महीने तक चलेगा। इस दौरान श्रीदाऊजी महाराज को विशेष रजाई गद्दल धारण कराई जाएगी।
श्रीदाऊजी महाराज गद्दल धारण कर भक्तों को सर्दी से बचाव का संदेश देते हैं। दाऊजी महाराज ने ओढ़ी रजाई समझो सर्दी आई। इसलिए यह पर्व गद्दल पूर्णिमा नाम से प्रसिद्ध है। प्रात: शहनाई वादन व बलभद्र सहस्त्रनाम का पाठ होगा। पंचामृत में केसर मिला कर विशेष अभिषेक कर ठाकुरजी को गर्म वस्त्र धारण कर शृंगार धारण कराए जाएंगे। दोपहर में मेवा युक्त खीर व रात को गर्म मेवा युक्त दूध का भोग लगाया जाएगा। सर्दी में मेवा, काजू, पिस्ता केसर की मात्रा भोग प्रसाद में बढ़ा दी है। सुहागा सोंठ का भोग लगाया जाएगा।
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445 वर्ष पूर्व बलदेवजी, रेवती मैया का प्राकट्य मार्गशीर्ष शुक्ल 15 संवत 1638, सन 1582 में हुआ था। उस समय श्रीमद् वल्लभाचार्य महाप्रभु के पौत्र गोस्वामी गोकुलनाथ ने पर्णकुटी में विशाल श्रीविग्रह की प्राण प्रतिष्ठा की। एक वर्ष बाद नए मंदिर में संवत 1639 सन 1583 को श्रीबलदेव, रेवती मैया की मूर्ति की पुराने मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की गई। सौ साल बाद 1683 में श्रद्धालुओं की भीड़-भाड़ के चलते वर्तमान विशालकाय मंदिर में मूर्ति स्थापित की गईं। हलधर शोध संस्थान के निदेशक डॉ घनश्याम पांडेय ने बताया 445 वर्षों से ऐतिहासिक व पौराणिक मेले का आयोजन हो रहा है। संवाद

सबसे प्राचीन विग्रह है
दाऊजी महाराज का श्रीविग्रह ब्रज के सभी मंदिरों में प्राचीन है। मूर्ति कुषाण कालीन है। बलदेवजी का 8 फीट ऊंचा व साढे़ 3 फीट चौड़ा श्रीविग्रह विशाल है। बलदेवजी के पीछे शेषनाग सात फनों से युक्त हैं। सामने उनकी सहधर्मिणी रेवती मैया का विग्रह सुंदर मनोहारी भाव में है।
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रजाई में लगता है 75 मीटर कपड़ा
पुजारी रामनिवास शर्मा, बंटी पुजारी ने बताया सर्दी से बचाव के लिए दाऊ बाबा और रेवती मैया की रजाई जिसे गद्दल कहते हैं में 75 मीटर कपड़ा और 12 किलो रुई भरी जाती है। शेष अवतार को सर्दी न लगे इसलिए दाऊ बाबा के कोट में 56 मीटर कपड़ा व 8 किलो रुई भरी जाती है।
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