बलदेव ब्रजराज दाऊजी महाराज व रेवती मैया का 444 वां पाटोत्सव (अगहन पूर्णिमा लख्खी मेला) के अवसर रविवार सुबह से ही भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। कार्यक्रमों की शुरूआत पंचामृत अभिषेक से हुई।
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प्रभु को गर्म वस्त्र धारण कराए गए। प्रभु को माखन-मिश्री का भोग लगाया गया। पूरा मंदिर परिसर दाऊ जी महाराज के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। इसके साथ ही दाऊ बाबा बड़ौ मतवारो..., अलबेली सरकार राधे-राधे आदि भजन पूरे दिन गूंजते रहे। रात में प्रभु को विशेष रजाई (गद्दल) धारण कराई गई।
प्रतिदिन दोपहर में मेवा युक्त खीर व रात को गर्म मेवा युक्त दूध का भोग लगेगा। सर्दी में मेवा काजू पिस्ता केसर की मात्रा बढ़ा दी है। इस अवसर पर दाऊजी महाराज और रेवती मैया बड़े मनोहारी लग रहे थे। मंदिर में प्रात से शहनाई वादन व विद्वानों ने बलभद्र सहस्रनाम पाठ व हवन हुआ। शहनाई वादन के दौरान श्रद्धालु नृत्य करते दिखे।
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नफीरी की धुन पर दाऊ बाबा बड़ौ मतवारो..., अलबेली सरकार राधे राधे, श्री दाऊजी महाराज तेरे माथे मुकुट विराज रहे हो, ठोढी पर हीरा चमक रहे हो, बरसाने वारी राधे राधे... भजन सुनकर भक्त भाव विभोर हो उठे। इसी के साथ धार्मिक स्थल क्षीर सागर पर सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ रही।