हरियाणा के रोहतक शहर के जाट कॉलेज में वर्ष 2021 में छह लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मरने वालों में मथुरा की नेशनल चैंपियन पूजा तोमर भी थीं। कोर्ट ने इस हत्याकांड के मुख्य दोषी सुखविंदर को फांसी की सजा सुनाई है।
मथुरा की दंगल गर्ल पूजा तोमर को शुक्रवार को इंसाफ मिला। उसके हत्यारे सुखविंदर को कोर्ट से फांसी की सजा सुनाई गई। उसके साथी पूर्व सैनिक मनोज को शस्त्र अधिनियम में तीन साल की सजा सुनाई गई है। इस सजा की खबर को पाते ही परिवार वालों के आंसू छलक उठे। उन्होंने कहा कि 12 फरवरी 2021 से अब तक वह हर रोज बांकेबिहारी से यही प्रार्थना करते थे कि हत्यारे को फांसी की सजा मिले। ईश्वर ने प्रार्थना सुनी। वह कोर्ट के इस फैसले से संतुष्ट हैं।
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बता दें कि मथुरा की दंगल गर्ल पूजा सहित छह लोगों की रोहतक में अखाड़े में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। महिला पहलवान पूजा तोमर मूल रूप से मथुरा जिले के जमुनापार थाना क्षेत्र के गांव सिहोरा निवासी थीं। वर्तमान में उनका परिवार शहर के लक्ष्मी नगर में रहता है। पिता रामगोपाल का यहां चौधरी मार्केट है। इसी मार्केट में पिता और भाई विष्णु कपड़े की दुकान करते है।
भाई विष्णु ने बताया कि जिस वक्त पूजा की हत्या हुई, वह महज 16 साल छह माह की थी। परिवार में दो अन्य बहन राधा और शीतल भी हैं। राधा की शादी हो चुकी है। शीतल एमएससी की पढ़ाई पूरी कर चुकी है। पूजा सभी भाई-बहनों में सबसे छोटी थी। पिता रामगोपाल और मां हेमलता ने कहा कि ईश्वर ने उनकी प्रार्थना को सुना। हत्यारे को फांसी की सजा सुनाई। तीन साल बाद उनके लिए खुशी का दिन आया है।
पूजा के साथ 'तपस्या-कामना' की हत्या
मथुरा। सुखविंदर ने न सिर्फ दंगल गर्ल पूजा तोमर सहित छह लोगों की हत्या की थी। बल्कि पूजा के साथ उसकी ओलंपिक में भारत के लिए सोना जीतने को की जा रही तपस्या और मथुरा में लड़कियों के लिए कुश्ती मैदान बनवाने की कामना की हत्या कर दी थी। पूजा मथुरा की पहली महिला पहलवान थी, जिसने ब्रज केसरी से लेकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर की चैंपियनशिप जीतीं। पूजा की मौत के बाद ब्रज का कोई पिता फिर अपनी बेटी को कुश्ती के मैदान में उतारने या फिर रोहतक या मेरठ भेजकर पहलवान बनाने की हिम्मत न जुटा सका।पूजा तोमर के भाई विष्णु ने बताया कि बहन की हत्या 12 फरवरी 2021 को हुई थी।
शाम को परिवार वालों को उसे गोली मारने की सूचना दी गई। तत्काल परिवार वाले रोहतक को रवाना हुए। वहां पूजा का शव मिला। उसके सिर में दो गोलियां मारी गईं थीं। विष्णु बताते हैं कि उस साल वृंदावन में कुंभ आयोजित हुआ था। पूजा 13 फरवरी को कुंभ मेले में आना चाहती थी। घटना से कुछ समय पहले ही उसने परिवार वालों को अपने आने की जानकारी दी थी, मगर हत्यारे की दो गोलियों ने उसे हमेशा के लिए विदा कर दिया। वह बताते हैं कि पूजा तोमर हमेशा कहती थी कि वह ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतेगी, जो उसे राशि मिलेगी, उससे मथुरा में लड़कियों के लिए कुश्ती का मैदान बनाएगी।
मैदान के बाद पर्दे पर देखा दंगल, लगाती गई पहलवानों को धोबी पछाड़
28 मार्च की दिन, सूर्य अपने चरम पर था। सिहोर गांव में रामनवमी की खुशी में महिला कुश्ती का आयोजन चल रहा था। देशभर से आईं महिला पहलवान अपना जौहर दिखा रहीं थीं। इस जौहर को देख 11 साल की पूजा तोमर की भुजाएं फड़क रही थीं। घर लौटने के बाद पूजा पिता रामगोपाल को कहती हैं कि उसे भी पहलवानी करनी है। पिता और मां हेमलता बच्ची की बात सुनकर हंसते और बात आई-गई हो जाती है, मगर उन्हें क्या पता था कि पूजा अगले ही दिन से अभ्यास शुरू कर देगी। 2016 में आमिर खान की दंगल फिल्म आती है और पूजा उसे पिता और मां के साथ देखती है। फिल्म देखने के बाद पूजा को प्रोत्साहन मिलता है और मां-पिता उसे पहलवान बनाने की हामी भरते हैं।
रामगोपाल बताते हैं कि हाईवे स्थित शिव शक्ति अखाड़ा में बेटी को अभ्यास के लिए भेजते हैं। कुछ माह के अभ्यास के बाद बेटी गणेशरा स्टेडियम में आयोजित दंगल में भाग लेती है और 49 किग्रा भार वर्ग में विरोधी पहलवानों को धोबी पछाड़ लगाकर ब्रज केसरी बन जाती हैं। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2016 में पिता ने उन्हें मेरठ के चौ. चरण सिंह स्टेडियम भेज दिया। वहां 2019 तक अभ्यास के बाद वह रोहतक के अखाड़ा जाट कॉलेज गईं। वहां से उसका खेलो इंडिया में चयन हुआ।
दंगल में हमेशा विरोधियों को हराया
पूजा तोमर ने 2016 में ब्रज केसरी का खिताब जीता। इसी वर्ष उप्र राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल जीता। इसके बाद 2017, 2018, 2019 में लगातार चार बार राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। 2019 में कोल्हापुर और 2020 में पटना में 57 किग्रा भार वर्ग में भी पदक जीता राष्ट्रीय चैंपियन बनी।