वैशाख माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाए जाने वाले अक्षय तृतीया पर्व के लिए मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसके लिए मंदिर के सेवायतों ने ठाकुरजी को लगाए जाने वाले चंदन को घिसने का कार्य शुरू कर दिया है। नगर के सप्तदेवालयाें ठाकुर राधादामोदर, राधारमण मंदिर, राधागोपीनाथ, राधागोविंद, राधा मदनमोहन, राधागोकुलानंद, राधा श्यामसुंदर के साथ हर ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर और राधावल्लभ मंदिर में चंदन शृंगार के अद्भुत दर्शनों की झांकी वर्ष में एक बार ही होती है।
राधादामोदर मंदिर के सेवायत कनिका गोस्वामी और कृष्णा गोस्वामी ने बताया कि अक्षय तृतीया पर गर्मी से राहत देते के लिए ठाकुरजी के शरीर पर यही चंदन का लेप लगाया जाता है। अक्षय तृतीया नौ मई को मनाई जाएगी। अक्षय तृतीया के अवसर पर वृंदावन के सप्त देवालयों में फूलबंगलों का आयोजन शुरू हो जाता है।
यहां के विश्व प्रसिद्ध बांकेबिहारी मंदिर और हरिदासी संप्रदाय के रसिक बिहारी के साथ-साथ टटीय स्थान पर स्थित मोहिनी बिहारी मंदिर में वर्ष में एक बार चरण दर्शन होते हैं जिसके कारण यहां विभिन्न राज्यों से आए भक्तों की अपार भीड़ रहती है।
ठाकुर बांकेबिहारी देंगे चरण दर्शन
वृंदावन। विश्व विख्यात ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में वर्ष में एक बार होने वाले चरण दर्शनों की तैयारियां शुरू हो गई हैं। अक्षय तृतीया पर विश्वप्रसिद्ध ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के चरण दर्शन होते हैं। पंडित मनीष शुक्ला ने बताया कि यह तिथि वसंत ऋतु के अंत और ग्रीष्म ऋतु के आगमन का पर्व है। नारद पुराण, मत्स्य पुराण आदि में इसके महत्व का उल्लेख मिलता है। जिसका हिंदू धर्म में विशेष महत्व है।
उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के मुहूर्त के बिना भी इस तिथि पर कोई भी शुभ कार्य किया जाता है। अक्षय तृतीया का पर्व ब्रजमंडल का एक विशेष पर्व भी माना जाता है। इस तिथि को जो भी दान पुण्य किया जाता है उसे यह तिथि अक्षय बना देती है।