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बरसाना के लोग कृष्ण को सुनाते हैं गाली

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नंदगांव (मथुरा)। ब्रज में गालियों का बड़ा महत्व है। तमाम मांगलिक अवसरों पर गालियां सुनाए जाने की प्रथा प्राचीन है। मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान राम के विवाह के दौरान जनकपुर की महिलाओं ने प्रेम पगी गालियां सुनाईं। इसी प्रकार द्वापर में भी बरसाना की महिलाओं द्वारा ठाकुर जी को गालियां सुनाने का उल्लेख मिलता है। ब्रज के बारे में एक कहावत है कि बोलंत हेला, वचनंत गारी।
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भक्ति काल के तमाम कवियों ने इन गालियों को अपने काव्य में पिरोया है। ब्रज में सगाई, लग्न, विवाह जैसे मांगलिक कार्यों में आज भी गालियों का प्रयोग महिलाओं द्वारा किया जाता है। नंदगांव-बरसाना में भी ये प्रथाएं देखने को मिलती हैं। नंदगांव राधा जी की ससुराल है। ऐसे में राधाष्टमी एवं होली के अवसर पर बरसाना के लोगों द्वारा प्रेम पगी गालियां कृष्ण को सुनाई जाती हैं।
गावैं दै दै तारियां हो ब्रज की नारियां सुकुमारि
लाला तेरी बहन छैल छिनकारी याकी श्रीदामा ते यारी
नंद नंदन तेरी भूआ जाकें क्वारी के सुत हुआ।
नंद नंदन तेरी काकी वह तौ काम कला में पाकी।
आज भी जब किसी तीज-त्योहार के अवसर पर समाज गायन के दौरान दोनों गांवों के लोग आपस में एक-दूसरे के सामने बैठ कर समाज गायन करते हैं तो बरसाना के लोग इन गालियों को कृष्ण के गांव के लोगों को सुनाते हैं। नंदगांव के लोग इस परिहास पर बुरा न मान कर प्रत्युत्तर देते हैं।
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ब्रज में बिना गाली के मिठास नहीं
ब्रजभाषा में बिना गाली के मिठास नहीं है। मांगलिक कार्यों में साहित्यिक गालियों को महत्व दिया गया है। लठामार होली पर भी समाज गायन के दौरान ठाकुर जी को अनुरागयुक्त गालियां सुनाई जाती हैं।
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- रामशरण शर्मा, शरन, साहित्यकार नंदगांव
इन गालियों में अश्लीलता, भौंडापन नहीं होता। माधुर्यरस होता है। इनमें केवल कटाक्ष होता है। साहित्यिक गालियों का चलन ब्रज में बहुत पुराना है।
श्यामलाल शर्मा, सेवानिवृत्त शिक्षक नंदगांव
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