मथुरा। बाढ़ की आपदा से जूझते राया ब्लॉक के 17 गांवों के 40 किसानों के सामने अब भूमिहीन होने का खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने जमीन पर सहकारी भूमि विकास बैंक से कर्जा लिया था, जिसे नहीं चुका पाने के कारण बैंक ने इन बकायेदारों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की तैयारी कर ली है। जमीन को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इन किसानों ने लंबे समय से कर्ज नहीं अदा किया है और न ही नोटिसों का कोई जवाब दिया है। ऐसे में इन किसानों को अंतिम नोटिस जारी कर दिया गया है।
मामला राया ब्लॉक के नगला भरऊ, भरऊगढ़, अनौडा, ब्योही, सीयरा, जगतिया, इटौली, गुडेरा, बल्टीकरी, नुनेरा, नगला टोडर, भैंसारा, नगला करन, वन्शै, पडरारी, पवेसरा, सुजानपुर गांवों के किसानों से जुड़ा हुआ है। बैंक के अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2012 से 2017 तक ऐसे 40 किसानों ने भूमि विकास बैंक से 134.02 लाख रुपये का कर्ज लिया था, लेकिन किसी ने कर्ज चुकाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।
लंबे समय से ऋण की अदायगी नहीं कर पाने के कारण बैंक ने इन किसानों से पत्राचार किया और बैंक शाखा में भी बुलाया गया। रकम जमा करने के लिए कई बार मोहलत दी गई। नोटिस भेजे और जवाब भी मांगे, मगर किसी किसान ने विभाग के नोटिस का जवाब देना तक उचित नहीं समझा। अब इन किसानों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया के तहत खेतों को कुर्क करने की तैयारी कर ली गई है। बैंक प्रबंधक ने बताया कि अंतिम मौका किसानों को दे दिया है। अब विभाग आगे की कार्रवाई करेगा।
सहकारिता विभाग के सहायक आयुक्त विवेक कौशल ने बताया कि बैंक से ऋण लेने वाले 40 किसानों को अंतिम नोटिस भेजा जा चुका है। अब भूमि कुर्क की कार्रवाई की जाएगी।
किसान बोले-कहां से चुकाएं कर्ज
कर्ज अदा नहीं करने वाले किसानों के अपने तर्क हैं। उनका कहना है कि मौसम की मार, महंगे डीजल-खाद और लगातार घाटे की वजह से फसल से उतनी आमदनी नहीं हो पाती कि कर्ज चुकाया जा सके। किसान राजवीर, विनोद कुमार, डोरीलाल, बृजेश कुमार ने कहा कि अगर हमारी जमीन ही छिन जाएगी तो हम परिवार का भरण-पोषण कैसे करेंगे। अब बाढ़ के कारण फसल प्रभावित हो गई है। दिवाली जैसे त्योहार भी नहीं मना सकेंगे।