दूसरे उठा रहे थे हमारे पैसों का फायदा
एसएचओ अजय किशोर ने बताया कि पिता की हत्या करने वाले विनोद ने पुलिस के सामने कबूल किया है कि मुआवजे की पहली किश्त में मिले तीन करोड़ रुपये में से उनको पूरा हिस्सा नहीं मिला। 2.5 करोड़ रुपये पिता हुकुम चंद सैनी ने भाई गुलाब चंद के साथ कोल्ड स्टोरेज में लगा दिए थे। मुझे भी कुछ रुपया दिया गया था। जिससे सोने-चांदी की दुकान खोली जो नहीं चल सकी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते मैं बेटी की पढ़ाई के लिए पैसे नहीं दे पा रहा था। मेरी बेटियां शादी के लायक हो गई थीं तो मैंने पिता से पैसे मांगे थे, वो नहीं दे रहे थे। हमारे रुपयों का दूसरे लोग फायदा उठा रहे थे और पांचों भाई भुखमरी के कगार पर थे। पिता को फिर से जमीन मुआवजे के 25 करोड़ रुपये मिलने वाले थे, जिसके चलते मुझे लगा कि कहीं ये रुपये भी पिता लुटा न दें। इसी के चलते मैंने उनकी हत्या कर दी। इससे मुआवजे की राशि हम पांच भाइयों को ही मिल सके।