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25 करोड़ के लिए पिता का कत्ल: आरोपी बेटा बोला- दूसरे उठा रहे थे हमारे पैसों का फायदा, मुझे लगा वो सब लुटा देंगे

Wed, 27 Apr 2022 09:40 PM IST
प्रशांत कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा। 

सार

आरोपी बेटे ने बताया कि पिता को फिर से जमीन मुआवजे के 25 करोड़ रुपये मिलने वाले थे, जिसके चलते मुझे लगा कि कहीं ये रुपये भी पिता लुटा न दें। इसी के चलते मैंने उनकी हत्या कर दी।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गोकुल बैराज के डूब क्षेत्र से मिलने वाले 25 करोड़ रुपये मुआवजे को हड़पने के लिए बेटे ने ही पिता की बेरहमी से हत्या की थी। सिर पर सब्बल(धारदार हथियार) से प्रहार करके हुई हत्या का खुलासा करते हुए सदर बाजार पुलिस ने हत्यारोपी बेटे को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने हत्या में प्रयोग सब्बल भी बरामद किया। 

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24-25 अप्रैल की दरम्यानी रात को थाना सदर बाजार की अशोक बिहार कॉलोनी में घर की छत पर सो रहे हुकुम चंद सैनी (80) की सब्बल से वार कर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने हत्या के खुलासे के लिए पांच टीमों को लगाया था। एसपी सिटी मार्तंड प्रकाश सिंह ने बताया कि बेटे विनोद सैनी ने ही पिता की हत्या की थी। हुकुम चंद सैनी को 2015 में गोकुल बैराज डूब क्षेत्र में खेत आने के कारण करीब 3 करोड़ रुपये का मुआवजा मिला था। 

इनमें से 2.5 करोड़ रुपये उन्होंने छोटे भाई गुलाब चंद सैनी के साथ कोल्ड स्टोरेज की पार्टनरशिप में लगा दिया था। 10 लाख रुपये अनिल सैनी, उनके बेटों में दो-दो, तीन-तीन लाख रुपये बांट दिए थे। हुकुम चंद पुत्रों से कोल्ड स्टोरेज की हिस्सेदारी के अलावा हिसाब-किताब को नहीं बताते थे। हुकुम चंद को फिर से मुआवजे के रूप में 25 करोड़ मिलने वाले थे। इसी को हुकुम चंद के पुत्र विनोद सैनी के मन में आया कि मुआवजे की राशि पिता फिर से कहीं अपने भाइयों में न बांट दें। यही सोचकर उसने अपने पिता की हत्या कर दी। थाना सदर बाजार एसएचओ अजय किशोर, सर्विलांस प्रभारी सोनू सिंह, एसआई घनेंद्र शर्मा, एसआई करूणा शंकर दीक्षित टीम में शामिल रहे।
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दूसरे उठा रहे थे हमारे पैसों का फायदा
एसएचओ अजय किशोर ने बताया कि पिता की हत्या करने वाले विनोद ने पुलिस के सामने कबूल किया है कि मुआवजे की पहली किश्त में मिले तीन करोड़ रुपये में से उनको पूरा हिस्सा नहीं मिला। 2.5 करोड़ रुपये पिता हुकुम चंद सैनी ने भाई गुलाब चंद के साथ कोल्ड स्टोरेज में लगा दिए थे। मुझे भी कुछ रुपया दिया गया था। जिससे सोने-चांदी की दुकान खोली जो नहीं चल सकी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते मैं बेटी की पढ़ाई के लिए पैसे नहीं दे पा रहा था। मेरी बेटियां शादी के लायक हो गई थीं तो मैंने पिता से पैसे मांगे थे, वो नहीं दे रहे थे। हमारे रुपयों का दूसरे लोग फायदा उठा रहे थे और पांचों भाई भुखमरी के कगार पर थे। पिता को फिर से जमीन मुआवजे के 25 करोड़ रुपये मिलने वाले थे, जिसके चलते मुझे लगा कि कहीं ये रुपये भी पिता लुटा न दें। इसी के चलते मैंने उनकी हत्या कर दी। इससे मुआवजे की राशि हम पांच भाइयों को ही मिल सके।
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