रियल एस्टेट कंपनी कर्मयोगी होम्स के डायरेक्टर उमेश चंद वर्मा के सुइसाइड मामले में कंपनी के एमडी और उनकी पत्नी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। रिपोर्ट उमेश की पत्नी ने दर्ज कराई है जिसमें आरोप लगाया है कि इन दोनों ने उसके पति को आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
रियल एस्टेट कंपनी कर्मयोगी होम्स के डायरेक्टर उमेश चंद वर्मा ने 11 नवंबर की सुबह को अपने मोतीकुंज एक्सटेंशन स्थित घर पर फांसी लगाकर जान दे दी थी। उमेश के परिवार वाले शुरूआत से ही रियल एस्टेट कंपनी के मालिकों पर आरोप लगा रहे हैं। बुधवार को उमेश की पत्नी ऊषा वर्मा ने थाना हाईवे में कर्मयोगी होम्स के एमडी दिनेश कुमार अग्रवाल और उनकी पत्नी मीनाक्षी अग्रवाल के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 और 506 में मुकदमा दर्ज करा दिया है। थाना हाईवे के प्रभारी निरीक्षक राजीव सिंह ने बताया कि मुकद्दमा दर्ज हो गया है। आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।
हैंडराइटिंग एक्सपर्ट पढ़ेंगे डायरी का एक-एक पन्ना
मुकदमा दर्ज होते ही हाइवे पुलिस ने अपनी जांच में तेजी ला दी है। मृतक की लिखी गई डायरी को हस्तलेख विशेषज्ञ (हैंडराइटिंग एक्सपर्ट) को भेजा जाएगा। इस जांच में हैंडराइटिंग का मिलान हो गया तो उल्लेखित किए गए नामों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
दिनेश के रसूख से नहीं मिला न्याय: विक्रम
मृतक के पुत्र इंजीनियर विक्रम वर्मा का कहना है उनके पिता को मोहरा बना गया। उनके पिता के नाम कोई भी प्लाट नहीं था। बेचने और खरीदने से कोई वास्ता नहीं। बेवजह उनके पिता को धोखाधड़ी में फंसाया गया। पिता की जमानत में भी नहीं होती, अगर हम लोग व्यक्तिगत रुप ये प्रयास नहीं करते। न्याय की उम्मीद पुलिस और न्यायालय से पूरी थी लेकिन दिनेश कुमार अग्रवाल के रसूख के चलते ऐसा संभव नहीं हुआ। अपनी और मां-भाई की सुरक्षा के प्रति चिंतित विक्रम वर्मा न्याय के लिए हर चौखट तक जाने की बात कही है।