आपरेशन जवाहर बाग में फोर्स की अगुवाई कर रहे एसपी सिटी मुकुल दिवेदी जब कब्जाधारियों के बीच फंसे तो उनके साथ चल रहे पुलिसकर्मी भाग खड़े हुए। दरअसल पुलिस वाले बगैर तैयारी के गए थे जबकि कब्जाधारी पेड़ों पर मोर्चा लिए बैठे थे।
हालांकि सिपाहियों ने गोली चलाने की अनुमति मांगी थी लेकिन जब अनुमति नहीं मिली तो वह मजबूर होकर अपने अफसर को छोड़कर बाग से बाहर आ गए।
एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी दो जून की शाम को करीब साढ़े चार बजे पुलिस लाइन से एक कंपनी पीएसी, अपने आठ हमराह, दो सीओ के साथ जवाहर बाग के लिए निकले थे। जवाहर बाग में पहुंचकर जेसीबी से बाग की बाउंड्री तुड़वाकर भीतर दाखिल होने का रास्ता बनवाया।
इसी दौरान पेड़ों पर बैठे कब्जाधारियों ने फोर्स पर हमला बोल दिया और एसपी सिटी को घेर लिया। एसपी सिटी ने उनको समझाने की काफी कोशिश की। कहा कि वह किसी को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। अदालत से जवाहर बाग को खाली कराने का आदेश हो चुका है लिहाजा वह फैसले का सम्मान करते हुए बाग को खाली कर दें। लेकिन भीड़ ने उन पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया। सिर पर वार किए गए।
साथ में मौजूद पुलिस वाले घबरा गए। कुछ पीछे हटने के बाद पुलिसकर्मियों ने गोली चलाने की अनुमति मांगी लेकिन तब तक घायल एसपी सिटी कुछ बोलने की स्थिति में ही नहीं रह गए थे। इसके बाद वह एक गड्ढे में गिर गए।
भीड़ अन्य पुलिस वालों की तरफ लपकी तो वह भाग खड़े हुए। सभी बाग से बाहर आ गए और फोर्स आने का इंतजार करने लगे। जब फोर्स आई तक वह दोबारा से बाग में दाखिल हुए और एसपी सिटी को वहां से निकालकर अस्पताल के लिए भागे। मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
एसएसपी ने बैठाई मामले की जांच
एसएसपी डा. राकेश सिंह ने बताया कि उन्हें भी इस प्रकार की जानकारी मिली है। लिहाजा पूरे प्रकरण पर जांच बैठा दी गई है। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।