रागार की बैरक नंबर 10 में गुरुवार की रात खामोशी छाई रही। इस बैरक में बलदेव का बालिका के दुष्कर्म में असफल होने पर हत्या करने का दोषी श्यामजीत उर्फ कलूटा निरुद्ध है। अदालत ने गुरुवार को उसे फांसी की सजा सुनाई थी।
प्रतिदिन की भांति पेट भर खाना खाने वाले श्यामजीत ने सजा के बाद कम खाना खाया। हर रोज जल्दी सो जाता था, लेकिन गुरुवार की रात वह बैरक में इधर-उधर घूमता रहा। सोने के लिए लेटने पर भी बेचैन दिखा। बार-बार करवटें बदलता रहा। रात भर सो नहीं सका।
शुक्रवार सुबह उसका मुंह उतरा दिखा। बिल्कुल थका-थका नजर आ रहा श्यामजीत अब अपने दिन गिनने लग गया है। इस संबंध में जेल अधीक्षक पीडी सलोनिया का कहना है कि फांसी के आए फैसले से उसके चेहरे की हवाइयां उड़ गई हैं।