किसी भी यात्री को नहीं बनाया गवाह
जीआरपी के सीओ द्वारा जो विवेचना की गई, उसमें वारदात स्थल ट्रेन की बोगी के किसी भी यात्री को गवाह नहीं बनाया गया। ट्रेन में सिपाहियों के अलावा अन्य यात्री भी सवार थे जो कि वारदात के चश्मदीद थे। बदमाशों के बारे में अन्य जानकारी भी रखते थे। लूटी हुई कारबाइन पुलिस ने 4 अक्तूबर 2012 को बुलंदशहर से लावारिस हालत में खेत से बरामद दिखाई। जिस असलहे का वारदात में प्रयोग किया गया, वह भी बरामद नहीं हो सका।
जीआरपी के अधिकारी ने हरेंद्र राणा या सोनू गौतम को जेल भेजने के बाद इतनी बड़ी वारदात में रिमांड तक पर नहीं लिया। जिस अभियुक्त मोहित भारद्वाज की हत्या की गई, उससे कोई लिंक जीआरपी नहीं बता सकी। सुपारी लिए जाने संबंधी भी कोई सबूत अदालत में पेश नहीं हो सका। एडीजीसी अवनीश उपाध्याय ने बताया कि अदालत ने 22 सितंबर 2022 को हरेन्द्र राणा सहित अन्य अभियुक्त को हत्या में बरी कर दिया था। उन्होंने इस संबंध में नौ नवंबर को हाईकोर्ट में अपील की है।