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40 मिनट में हो गया आजीवन कारावास

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मथुरा। कोर्ट में सजा होने के बाद दोषी को ले जाती पुलिस। - फोटो : MATHURA
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मथुरा। भरतपुर के राजा मानसिंह की हत्या के मामले में 35 वर्ष तक सुनवाई होने के बाद न्यायाधिकारी निर्णय की घड़ी तक पहुंचे। न्यायालय में मात्र 40 मिनट में 35 साल पुराने मामले में आरोपी 11 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुना दी गई। जिला जज साधना रानी ठाकुर के चेहरे की गंभीरता सजा सुनाने से पहले ही किसी बड़े निर्णय की ओर इशारा कर रही थी। इस दौरान दोषी 11 पुलिसकर्मी भी गंभीरता से सजा सुनने को आतुर थे। कई पुलिसकर्मी बार-बार पसीना भी पौंछ रहे थे।
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रतन लाल फूल कटोरी इंटर कालेज की अस्थाई जेल से बंदियों की गाड़ी में दोषी 11 पुलिसकर्मियों को न्यायालय परिसर में लाया गया। 11 बजकर 32 मिनट पर गाड़ी न्यायालय परिसर में पहुंची। 11 बजकर 56 मिनट पर सभी पुलिसकर्मी गाड़ी से उतरकर कोर्ट की ओर रवाना हुए। 12 बजकर 20 मिनट पर न्यायालय में सुनवाई हुई। इस पर करीब 15 मिनट तक बहस भी हुई। न्यायालय ने निर्णय पर करीब 1.00 बजे आखिरी मुहर लगा दी। इसके बाद कागजी कार्यवाही की गई। दोपहर ढाई बजे दोषी पुलिसकर्मी जिला जज के न्यायालय से पुलिस वैन की ओर रवाना हुए। पौने तीन बजे पुलिस वैन सभी दोषी पुलिसकर्मियों को लेकर अस्थाई जेल की ओर रवाना हुई। इस दौरान पुलिस वैन के साथ फायर बिग्रेड की गाड़ी, एबुंलेंस और पुलिस की दो गाड़ियां भी जेल तक साथ गईं। दोषी पुलिसकर्मियों के न्यायालय परिसर में पहुंचने और वहां से रवाना होने के दौरान सरकारी कैमरे से वीडियो रिकार्डिंग और फोटोग्राफी भी की गई।
परिजन कर रहा था वीडियो रिकॉर्डिंग
जिस समय दोषी न्यायालय जा रहे थे ठीक उसी समय न्यायालय कैंपस में ही एक युवक दोषियों की मोबाइल से रिकॉर्डिंग कर रहा था। इस युवक पर सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रही सीओ सिटी आलोक दुबे की नजर पड़ गई। उन्होंने उसे टोका। बाद में पुलिसकर्मियों ने उसे न्यायालय परिसर से बाहर कर दिया।
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