अपर जिला एवं सत्र न्यायालय नौ ने रामवृक्ष की मौत की वैज्ञानिक पुष्टि करने के आदेश दिए है और कहा है कि उसके डीएनए का परिवारीजनों के डीएनए से मिलान कराकर रिपोर्ट पेश न्यायालय में पेश की जाए। तब उसकी मौत की पुष्टि नहीं की जा सकती और उसके खिलाफ पूर्व में न्यायालय से जारी गैर जमानती वारंट जारी रहेगा।
कोर्ट ने यह आदेश राज्य बनाम राम सुमरन मामले में पुलिस द्वारा दाखिल की गई रामवृक्ष की मौत हो जाने की रिपोर्ट पर दिए। इस मामले में वादी रवि सुरेश दुबे है और उन्होंने 17 जून, 2011 को थाना हाईवे में रामवृक्ष यादव समेत नौ लोगों के खिलाफ जानलेवा हमला करने और धमकी देने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कोर्ट ने रामवृक्ष और उसके साथियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिए थे।
उसकी गिरफ्तारी न होने पर कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि वह पकड़ा क्यों नहीं जा रहा है। इस पर थाना हाईवे के दरोगा विनोद मिश्रा अदालत में पेश हुए और कहा कि दो जून को जवाहर बाग हिंसा में रामवृक्ष की मौत हो चुकी है। जलने से उसकी मौत हुई थी। पुलिस ने जेल में बंद उसके साथी हरनाथ सिंह ने इसकी शिनाख्त की है। 72 घंटे तक परिवार वालों का इंतजार भी किया गया मगर कोई नहीं आया लिहाजा शव का अंतिम संस्कार करा दिया गया।
डीएनए टेस्ट के लिए सैंपल ले लिए गए थे, लेकिन कोर्ट ने पुलिस द्वारा पेश की गई रिपोर्ट पर विश्वास न करते हुए कहा है कि रामवृक्ष की मौत का कोई वैज्ञानिक साक्ष्य पेश किया जाए, तभी मौत मानी जाएगी।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विवेकानंद सरन त्रिपाठी ने अभी उसके परिवारीजनों ने भी शिनाख्त नहीं की है और उसका शव व चेहरा पूरी तरह से जल जाने के कारण पहचान किए जाने लायक नहीं था। जिस व्यक्ति ने शिनाख्त की, वह भी आरोपी है। शिनाख्त के समय रामवृक्ष यादव के निकट परिवारीजन मौजूद नहीं थे।
उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी और एसओ हाईवे को आदेश दिया है कि शव के विसरा क ा नमूना फोरेंसिक लैब भेजकर डीएनए कराए और उसका परिवारीजनों के डीएनए से मिलान कराकर रिपोर्ट न्यायालय में पेश करें।