जवाहर बाग प्रकरण की जांच की आंच अब जिला पूर्ति अधिकारी (डीएसओ) आफिस तक पहुंच गई है। पुलिस इस पड़ताल में लगी है कि जवाहर बाग में रसोई गैस के सिलेंडरों की आपूर्ति कहां से हो रही थी।
डीएसओ केपी मिश्र ने बताया कि पुलिस का इस संबंध में पत्र आया था। हमने अपना पक्ष रख दिया है। गैस के कनेक्शन जारी करने और वितरण का कार्य सीधे एजेंसी या फिर ऑयल कंपनियों के प्रबंधक करते हैं।
सारी प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बाद गैस कनेक्शन जारी करने, सिलेंडरों की आपूर्ति की उनके कार्यालय में कोई जानकारी नहीं रहती। उनके कार्यालय से जवाहर बाग में रह रहे किसी भी कब्जेधारी का राशन कार्ड जारी नहीं किया गया है।
जवाहर बाग में दो जून को थे ढाई हजार लोग
चंदनबोस ने गुरुवार को पुलिस पूछताछ में खुलासा किया कि दो जून को जवाहर बाग में ढाई हजार लोगों की भीड़ थी। अभी तक पुलिस और खुफिया एजेंसियां दावा करती रही हैं कि तब जवाहर बाग में एक हजार लोग थे।
जवाहर बाग में यूपी, झारखंड और बिहार तक के लोग रहे थे। इनके रहने के लिए बाकायदा तंबुओं की पूरी कालोनी बन गई थी। महिलाएं भी बड़ी संख्या में थीं। दो जून को आपरेशन जवाहर बाग के समय भी यहां ढाई हजार लोग थे।
पुलिस पूछताछ में चंदनबोस ने बताया कि ढाई हजार लोगों की संख्या इसलिए उसे याद है क्योंकि दो जून की सुबह सभी की हाजिरी ली गई थी। जब उससे वहां होने वाली मौतों के बारे में पूछा गया तो उसका कहना था कि वह तो शुरुआत में ही भाग गया था।