मंत्री यहीं नहीं रुके उन्होंने प्रदेश की राजनाथ सरकार और सपा के साथ रालोद के गठबंधन के चलते उनका पत्ता साफ होने की भी बात कही। उन्होंने दावा किया जब भाजपा के साथ रालोद का गठबंधन अटल जी के समय हुआ था तो उन्होंने भाजपा के तत्कालीन सीएम राजनाथ सिंह को रालोद के पटपांव होने के प्रति आगाह किया था। कहा कि एक बार फिर जब भाजपा के साथ रालोद का 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले गठबंधन हुआ तो भाजपा का बंटाधार हो गया। भाजपा जहां 400 सीटें जीत रही थी, वहां 240 सीटों पर आ गई। कहा कि गठबंधन के बाद भी मुजफ्फरनगर और कैराना जैसी सीटें भाजपा हर गई।
कैबिनेट मंत्री के बयान से चर्चाओं का दौर शुरू
भाजपा को जहां अनुशासन के लिए जाना जाता है, वहीं योगी सरकार के मंत्री चौ. लक्ष्मीनारायण का गठबंधन के बाद भी रालोद पर वार, लोगों को समझ नहीं आ रहा है। उनके बयान के साथ ही चर्चाओं का दौर भी शुरू हो गया है। सोशल मीडिया पर लोग तरह-तरह की टिप्पणी कर रहे हैं। कोई मंत्री का भाजपा से मोह भंग होने की बात कह रहा है तो कोई उनके बयान को सुनियोजित बता रहा है।
रालोद के गर्भ से पैदा हुए चौधरी लक्ष्मीनारायण: तेजवीर सिंह
कैबिनेट मंत्री चौ. लक्ष्मीनारायण के बयान पर रालोद ने भी पलटवार किया। सोमवार को रालोद कार्यालय पर हुई पत्रकार वार्ता में पूर्व मंत्री तेजवीर सिंह ने कहा कि कैबिनेट मंत्री रालोद के गर्भ से पैदा हुए हैं, वह उनकी जननी है। उन्होंने बिना सोचे समझे यह बयान दिया है। भाजपा को भी उन्होंने नहीं बख्शा। पूर्व मंत्री ने कहा कि सहयोगी पार्टी होते हुए भी वह गठबंधन धर्म को निभाना नहीं जानते हैं और अपनी पार्टी को भी नहीं बख्शते हैं। उन्होंने ऐसे मंत्री को बर्खास्त करने की मांग की। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पहली बार चौ. लक्ष्मीनारायण ने छाता सीट से चुनाव लड़ा था। उनके लिए पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने झोली फैलाकर वोट मांगे थे, जिसके बाद ही वह पहली बार जीतकर विधायक बने थे।
रालोद के राष्ट्रीय महासचिव संगठन त्रिलोक त्यागी ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ भाजपा नेता दिग्भ्रमित हो जाते हैं। बढ़ती उम्र में नेताओं को सोच समझकर बोलना चाहिए। रालोद भाजपा के साथ आई इसीलिए लोकसभा चुनाव में भाजपा 240 सीटों पर पहुंचीं, नहीं तो भाजपा 200 सीटों पर भी नहीं पहुंच रही थी।
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