मथुरा। छत्तीसगढ़ कुंज में व्यासपीठ से कथा सुनाते महाराज रामभद्राचार्य महाराज।
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वृंदावन। पद्म विभूषण जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने कहा कि वे अपनी 1358वीं श्रीमद्भागवत कथा को ऐतिहासिक बनाना चाहते हैं। उन्होंने शास्त्रों की उपेक्षा पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि आज शास्त्रीय ग्रंथों की जैसी दुर्गति हो रही है, वैसी कल्पना भी नहीं की थी।
परिक्रमा मार्ग स्थित छत्तीसगढ़ कुंज, तुलसी कुंज परिसर में विराजमान प्राचीन ठाकुर मथुरामल्ल भगवान की उपस्थिति में चल रही श्रीमद्भागवत कथा एवं जन्माष्टमी महोत्सव के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को कथा व्यास रामभद्राचार्य महाराज ने भगवान की भूमिका को स्पष्ट करते हुए कहा कि वही परमात्मा सृष्टि के उपादान और निमित्त कारण हैं, जिनके तेज से संतों के तेज की उत्पत्ति होती है। स्वामी जी ने यमुना में बहते दीपों का मार्मिक उदाहरण देते हुए कहा कि जब कन्हैया दीपों को किनारे लगाने लगे और यशोदा मां ने पूछा कि कितनों को लगाओगे, तो कन्हैया ने कहा जो सामने आएगा, उसे ही। इससे यह स्पष्ट होता है कि भगवान से जो जीव साक्षात होता है, उसका उद्धार निश्चित है।
रामभद्राचार्य ने कहा कि बिना पाणिनीय व्याकरण के श्रीमद्भागवत की सच्ची व्याख्या संभव नहीं। उन्होंने बताया कि भागवत का शुभारंभ ‘ज’ अक्षर से होता है जो स्वर व्यंजन का आठवां अक्षर है। केशव भी देवकी के आठवें पुत्र के रूप में अवतरित हुए। इस प्रकार आठ का विशेष महत्व है। इस दौरान पीपा पीठाधीश्वर बलरामदास देवाचार्य, महंत गोपीकृष्ण दास, सीओ सदर संदीप सिंह, मदन मोहन दास, पार्षद सुमित गौतम, अंशुल पाराशर, रोहित रिछारिया, राज कुकरेजा सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।
सांसद मनोज तिवारी ने दी प्रस्तुति
कथा के दूसरे दिन शाम को सांसद और भोजपुरी गायक मनोज तिवारी ने बेहतरीन प्रस्तुति दी। उनके भजनों को सुनकर श्रद्धालु झूमने पर मजबूर हो गए। एक से बढ़कर एक गीतों ने दिल को छू लिया।