देवी मंदिरों के आसपास वाले मार्केट में बिकने वाली माता की चुनरी मथुरा में बड़े पैमाने पर तैयार की जा रही हैं। आर्डर पूरा करने को दिन-रात फैक्ट्रियों में काम चल रहा है। चुनरी के साथ मंदिरों में लगाई जाने वाली झंडियां और पटकों की भी काफी मांग आ रही है। कहीं जनवरी के अंतिम सप्ताह में तो कहीं फरवरी के पहले सप्ताह तक आर्डर पूरा किया जाना है।
नवरात्र में भले ही अभी वक्त है, लेकिन तैयारियां शुरू हो गई हैं। मथुरा की फैक्ट्रियों में धड़ाधड़ चुनरी तैयार की जा रही हैं। उत्तर प्रदेश के साथ ही बिहार, अरुणाचल प्रदेश, राजस्थान, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली से चुनरी बनाने के आर्डर मथुरा की फैक्ट्रियों को मिल गए हैं। मथुरा में दस से ज्यादा फैक्ट्रियों में चुनरी का काम कराया जा रहा है।
विशाल रुहेला का कहना है कि देश भर में जहां भी देवी के प्रमुख मंदिर हैं वहां से सबसे ज्यादा आर्डर आते हैं। मथुरा में काली पीठ, वृंदावन में कात्यायनी पीठ, विंध्याचल देवी (मिर्जापुर), वैष्णो देवी (जम्मू कश्मीर), कैला देवी करौली (राजस्थान), नैना देवी (पंजाब), शाकुंभरी देवी (सहारनपुर), कामाख्या देवी (असम), काली देवी (बंगाल), मंसा देवी-चंडी देवी (हरिद्वार), ज्वाला देवी (हिमाचल प्रदेश), करणी मां (बीकानेर) और चिंतपूर्णी देवी हिमाचल में नवरात्र पर माता की चुनरी की मांग बढ़ जाती है। भक्त यहां मां को चुनरी धारण कराते हैं।
कारोबारी राजेश कुमार का कहना है कि प्रमुख मंदिरों के साथ ही देश भर में जहां भी माता के मंदिर होते हैं वहां से चुनरी और पटका की मांग आती है। मंदिरों के आसपास लगाई जाने वाली झंडियों की मांग भी बड़े पैमाने पर आ रही है। दिल्ली के बड़े कारोबारी भी मथुरा की फैक्ट्रियों को आर्डर दे रहे हैं। बाद में इनके द्वारा ही देश भर में सप्लाई की जाती हैं। इस कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि नोटबंदी के कारण कारोबार जो मंदा हुआ था उसे इससे थोड़ी राहत मिल जाएगी। जिन फैक्ट्रियों में ताले लगाने की नौबत आ गई थी वहां फिर से काम शुरू हो गया है। समय से आर्डर पूरा करने के लिए मजदूरों की संख्या भी फैक्ट्रियों में बढ़ रही है।