मथुरा। जिस नगरी में श्रीकृष्ण ने मानवता और करुणा का संदेश दिया, उसी मथुरा जंक्शन पर मां की मौत के बाद उसके बच्चों की बेबसी ने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर दिया। सफदरजंग अस्पताल, दिल्ली से इलाज कराकर ट्रेन से लौट रही शेरगढ़ के गांव बसई निवासी वीर सिंह की 62 वर्षीय पत्नी सफेदी की मथुरा पहुंचते ही मौत हो गई। मां का शव लेकर बेटी और बेटा स्टेशन पर मदद की गुहार लगाते रहे। आरोप है कि उन्हें न स्ट्रेचर मिला और न समय पर एंबुलेंस की मदद मिल सकी।
परिजन के मुताबिक, मां की मौत के बाद बेटी पुष्पा ने 112 पर कॉल कर एंबुलेंस मांगी। मौके पर पहुंचे जीआरपी के दो दरोगा और चार सिपाहियों से भी उसने मदद मांगी। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने बेटे यशपाल को रंगेश्वर मंदिर के पास से निजी एंबुलेंस लाने के लिए कहा। इसके बाद यशपाल एक व्यक्ति की स्कूटी से एंबुलेंस लेने चला गया।
मां को खो चुके बच्चों की यह बेबसी देखकर मौके पर मौजूद एक यात्री ने घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। इसके बाद रेलवे, जीआरपी और आरपीएफ अधिकारियों में हलचल मच गई। अधिकारी मौके पर पहुंचे और परिजन से जानकारी ली। हालांकि तब तक परिजन निजी एंबुलेंस की व्यवस्था कर चुके थे और शव को गांव बसई ले गए।
सूचना मिलते ही तत्काल मौके पर सभी व्यवस्था की गई थी। उन्होंने जो मांगा तत्काल व्यवस्था कराई गई। एंबुलेंस दूसरी मंगाई गई।
सुनील कुमार शर्मा, स्टेशन निदेशक
परिजनों ने संपर्क साधा था तत्काल उन्हें आधार कार्ड जमा करके सुविधा उपलब्ध कराई गई। बाद में मौत की खबर आई।
राजीव दीक्षित, क्षेत्राधिकारी जीआरपी