जवाहर बाग की हिंसा को करीब से देखने वालीं यह 21 मासूम बच्चियां पिछले 20 दिन से हंसी नहीं हैं। डर और दहशत का भाव इन मासूम चेहरों पर अब भी साफ दिखाई दे रहा है। कुछ तो बिलकुल गुमसुम हो गई हैं। हालांकि नारी निकेतन प्रशासन का कहना है कि इन मासूमों को सामान्य करने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है, लेकिन साहब मां तो कोई नहीं बन सकता है। बाप का दुलार तो दूसरा नहीं दे सकता है।
मथुरा के जवाहर बाग में हुई हिंसा को लोग साल-दस साल में भूल जाएंगे, लेकिन यह मासूम बच्चियां जिन्होंने गोली बारी, पथराव, फटते बम और लहूलुहान होते लोग। जगह-जगह बिखरे पड़े शव देखे होंगे इनके लिए इसे भूल पाना वाकई बड़ा मुश्किल होगा। हां यदि यह अपने घर में होतीं तो शायद जवाहर बाग की उस डरावनी शाम को भूल जातीं, लेकिन यह अपनों से कोसों दूर नारी निकेतन में रह रही हैं। पुलिस ने इन बच्चियों को दो और तीन जून को जवाहर बाग से बरामद किया था। इन सभी की उम्र नौ से 13 साल के बीच की है।
कहतीं हैं, दीदी मेरी मम्मी से बात करा दो
नारी निकेतन की अधीक्षिका बीना शर्मा का कहना है कि जो बच्चियां बहुत छोटी हैं वह तो हर वक्त अपनी मम्मी से बात कराने को कहती रहती हैं। कभी कहती हैं मोबाइल पर बात कराओ तो कभी बुलाने की जिद करने लगती हैं। कुछ बच्चियों के घर वालों का तो पता चला गया है कि उनकी मम्मी जेल में बंद हैं। जबकि चार बच्चियों के घर वालों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। उन्हें तलाशा जा रहा है।
परिवार वालों को तलाशा जा रहा है
सिटी मजिस्ट्रेट रामअरज यादव का कहना है कि जो भी बच्चे हैं उनके परिवार वालों को तलाशा जा रहा है। कुछ जगह से लोग आने भी लगे हैं। बच्चों का पूरा ख्याल नारी निकेतन में रखा जा रहा है। जल्द ही सभी बच्चों को उनके घर भिजवा दिया जाएगा।
बेटे की तलाश में दर दर भटक रहे मां-बाप
गोंडा जिले के डेलारी गांव निवासी रामरतन और कलावती अपने 14 साल के बेटे के लिए दर दर भटक रहे हैं। परिवार वालों का कहना है कि उनका बेटा दीपक कक्षा आठ में पढ़ता है। गांव से कुछ लोग मथुरा में बाबा जयगुरुदेव आश्रम के लिए आए थे। दीपक भी उनके साथ आ गया था। अब उसका पता नहीं चल रहा है। जो लोग साथ आए थे वह तो जेल में बंद हैं, लेकिन दीपक का कहीं कुछ पता नहीं है।