- चार दिन तक चलने वाले इस पर्व का 20 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
मथुरा/टाउनशिप। लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ शुक्रवार से शुरू से हो रहा है। इसका समापन 20 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर होगा। छठ पूजा की शुरूआत पहले दिन नहाय-खाय के साथ होगी।
छठ महापर्व सूर्य उपासना का पर्व है। पर्व में भगवान सूर्य के साथ छठ माता की पूजा विधि-विधान के साथ की जाती है। इसकी शुरूआत 17 नवंबर से नहाय-खाय, के साथ हो रही है। 18 को खरना, 19 को संध्या अर्घ्य और 20 को उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ पर्व का समापन होगा। मान्यता है कि छठ का व्रत संतान प्राप्ति की कामना, संतान की कुशलता, सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है।
पूर्वांचल सेवा समिति एवं भारतीय सांस्कृतिक समाज के मीडिया प्रभारी शशि भूषण दुबे ने बताया कि यह व्रत कठिन माना जाता है। इसमें 36 घंटों तक कठिन नियमों का पालन करते हुए व्रत रखा जाता है। व्रत रखने वाले लोग चौबीस घंटे से अधिक समय तक निर्जला उपवास रखते हैं। मुख्य व्रत षष्ठी तिथि को रखा जाता है, लेकिन छठ पूजा की शुरुआत कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से हो जाती है।
ऐसे रहेगा व्रत का क्रम
17 नवंबर को नहाय-खाय के साथ व्रत शुरू होगा। 18 को खरना यानी लोहंडा पूजा होगी। 19 को संध्या अर्घ्य। इस दिन छठ पर्व की मुख्य पूजा की जाती है। व्रती और उनके परिवार के लोग घाट पर आते हैं और डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। चौथे दिन 20 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर इस महाव्रत का पारण किया जाएगा।