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गिरिराजजी: पैर की हट्टी टूट गई...फिर भी हर रोज दो बार करते परिक्रमा, टोली में शामिल हैं सीए व बड़े व्यापारी

Thu, 29 Jun 2023 10:06 PM IST
भूपेन्द्र सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा

सार

उन पावन पांवों की बलिहारी हूं, जो वेदना सहकर भी हंसते हुए अपने गिरिराज की परिक्रमा करते हैं। ऐसे भक्तों के आगे भक्ति भी मत्था टेकती है। हमारे-आपके जीवन में गोवर्धन हैं।
 
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Mathura News: परिक्रमा शुरू करने से पहले दंडवत होती भक्तों की टोली और विदेशी श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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तीर्थनगरी मथुरा में चैतन्य बाबा ने अपना पूरा जीवन ही गोवर्धन के नाम कर दिया है। स्वयं को इस सात कोस को जो सौंप दिया है। लड़खड़ाते पैरों को बैंत का सहारा देकर गिरिराजजी की नित दो परिक्रमा करते हैं। चेहरे पर दिव्य तेज चमकता है। कहते हैं, कष्ट में ही सुख मिलता है। हमारी आत्मा में जो आनंद आता है, उसे शब्दों में नहीं कह सकते।

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सच है, भाव का यह अथाह सागर शब्दों में नहीं समाता। चैतन्य महाप्रभु के नगर नवद्वीप से आए चैतन्य बाबा की प्रगाढ़ भक्ति को सौ-सौ नमन है। करीब 35 साल से चैतन्य बाबा गोवर्धन की परिक्रमा कर रहे हैं। पहले तीन परिक्रमा करते थे लेकिन चार साल पहले ऑस्टियोपॉरोसिस बीमारी हो गई। 

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चैतन्य बाबा के पैर की हड्डी टूट गई। उसमें रॉड तो पड़ गई, लेकिन हड्डी अभी पूरी तरह जुड़ी नहीं है। तब से बाबा रोज दो बार गोवर्धन की परिक्रमा करते हैं। उनके साथ करीब 50 भक्तों की टोली है। सुबह 5.30 बजे गोविंद कुंड से परिक्रमा के लिए निकलते हैं। रात 10 बजे के बाद ही पहुंचते हैं। इस टोली में कोई सीए है तो कोई व्यापारी। ये लोग सब कुछ त्यागकर गोवर्धन की शरण में आ गए।

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चैतन्य बाबा अपने साथियों के साथ परिक्रमा मार्ग में ही मिले। अखबार का सुनकर बोले, हम बात नहीं करता, सब हमें जान जाएगा। बड़े अनुनय के बाद बोलना शुरू किया लेकिन शब्द कम थे और भाव अधिक। 61 वर्षीय चैतन्य कारोबारी थे। नवद्वीप में एक महात्मा के संपर्क में आए। उन्होंने भजन का मार्ग दिखाया। बाबा अपने गोविंद की शरण में आ गए। फिर गोवर्धन बाबा को अपना जीवन अर्पित कर दिया। शादी नहीं की।
 

वह कहते हैं परिक्रमा करके चित्त में अलौकिक आनंद आता है। उनकी टोली के सनातन दास पिछले 12 वर्षों से गिरिराज जी की परिक्रमा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि गिरिराज जी मुकुटमणि हैं। ये अभीष्ट प्रदान करते हैं। विषय तो देंगे ही, मुक्ति भी दे देंगे। हम सब लोग दिन भर सात कोस में ही रहते हैं। मधुकरी करके जीवन यापन करते हैं। ब्रजवासी बड़ी सेवा करते हैं, कोई कमी नहीं। कहते हैं, गिरिराज जी के दिव्य अनुभव हैं, जिन्हें संत लोग प्रकट नहीं करते। निखिल बनर्जी, माधवदास और भोला भी बाबा के संग रोज गिरिराज जी की परिक्रमा करते हैं।

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अभिराम बाबा का प्यारा भाव

साक्षात श्याम गिरिराज धाम की पावन रज को भक्त अपने भाव से सींच रहे हैं। अनेक भक्त राधा-राधा रटते हुए रोज परिक्रमा करते हैं। उनकी चर्या ही यही है। अभिराम दास बाबा का भाव बड़ा प्यारा है। झोले में खूब सारी टॉफियां लेकर परिक्रमा करने के लिए निकलते हैं। मार्ग में जितनी भी बच्चियां मिलती हैं, उन्हें टॉफी देकर राधा रानी की जय बुलवाते हैं। बाबा इनमें राधा रानी को ही पाते हैं। इन पर दुलार लुटाते हैं। टॉफी बांटते हुए आराम से परिक्रमा करते हुए चलते हैं। 30 वर्षों से बाबा का यह नित्य नियम है।
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