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घर पहुंची सीबीएसई की उत्तर पुस्तिकाएं, जांचेंगे 300 परीक्षक

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मथुरा। सीबीएसई का अधूरा मूल्यांकन एक बार फिर शुरू हो गया है। बुधवार को जनपद में 10 मूल्यांकन केंद्रों से जुड़े परीक्षकों को उत्तर पुस्तिकाएं सौंपी गईं। तीन सौ से अधिक परीक्षक इस दायित्व को इस बार घर बैठकर ही पूरा करेंगे।
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हाईस्कूल और इंटर की परीक्षाओं के साथ ही शुरू होने वाला सीबीएसई की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन का कार्य इस बार 25 मार्च को लॉकडाउन होने तक पूरा नहीं हो सका था। जनपद में करीब 20 प्रतिशत उत्तर पुस्तिकाएं मूल्यांकन से रह गई थीं। सीबीएसई ने एक बार फिर बुधवार से अधूरे मूल्यांकन शुरू करा दिया है।
जनपद में मूल्यांकन के लिए 10 केंद्र बनाए गए थे, लेकिन इस बार मूल्यांकन केंद्रों पर न कराते हुए परीक्षकों को घर पर ही उत्तर पुस्तिकाएं भेजी गई हैं। बुधवार को जनपद में तीन सौ परीक्षकों के घरों पर उत्तर पुस्तिकाएं पहुंचाई गई हैं। सभी परीक्षकों को 200-200 उत्तर पुस्तिकाओं का बंडल दिया गया है। इससे फिलहाल हॉटस्पॉट इलाके को अलग रखा गया है।
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इन केंद्रों से भेजी गई उत्तर पुस्तिकाएं
- श्रीजी बाबा सरस्वती शिशु मंदिर, केंद्रीय विद्यालय कैंट, केंद्रीय विद्यालय मथुरा रिफाइनरी, दिल्ली पब्लिक स्कूल, रिफाइनरी नगर, सेंट डामिनिक्स सीसे. स्कूल, जिंदल विद्या मंदिर कोसीकलां, कान्हा माखन पब्लिक स्कूल व हनुमान प्रसाद धानुका विद्या मंदिर।
बुधवार से मूल्यांकन सीबीएसई के दिशानिर्देश के तहत शुरू हो गया है। सभी परीक्षकों को केंद्रों द्वारा उत्तर पुस्तिकाएं घर पहुंचाई गई हैं। कुछ सूचनाएं ऐसी भी आई हैं कि हॉटस्पॉट इलाकों में परीक्षकों का घर होने के कारण उन्हें उत्तर पुस्तिकाएं पहुंचाना संभव नहीं हुआ है। फिलहाल इस क्षेत्र को छोड़कर बाकी परीक्षकों से मूल्यांकन शुरू करा दिया गया है।
- डॉ. अजय शर्मा समन्वयक, सीबीएसई
यूपी बोर्ड की भी हलचल शुरू
मथुरा। ग्रीन जोन और ऑरेंज जोन में मूल्यांकन के बाद यूपी बोर्ड अब रेड जोन पर विचार कर रहा है। संभावना जताई जा रही है कि लॉक डाउन-3 खत्म होने के बाद यूपी बोर्ड रेड जोन में उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरू करा देगा। इसी दायरे में मथुरा जनपद भी आ रहा है, जहां पिछले दिनों मूल्यांकन रोक दिया गया था। मथुरा के सभी चार मूल्यांकन केंद्र भी हॉटस्पॉट इलाके में स्थिति हैं, जहां मूल्यांकन को लेकर शिक्षक नेताओं ने तमाम सवाल खड़े किए थे। प्रथम चरण के अंतर्गत जनपद में सिर्फ 7 प्रतिशत ही मूल्यांकन हो सका था।
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