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विप्रा ने परिक्रमा मार्ग में ध्वस्त किए अवैध निर्माण

Thu, 21 Jan 2016 12:00 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के कड़े रुख के बाद बुधवार को भारी पुलिस बल के साथ विकास प्राधिकरण (विप्रा) के अधिकारियों ने यमुना के डूब क्षेत्र परिक्रमा मार्ग में अवैध निर्माण और अतिक्रमण ढहाने का कार्य शुरू किया। प्रशासन के कड़े रुख से क्षेत्र के लोगों में हड़कंप मच गया।
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सिटी मजिस्ट्रेट विजय सिंह, विप्रा सचिव एसबी सिंह, एसपी सिटी शैलेष पांडेय के नेतृत्व में टीम ने वृंदावन पानी गांव रोड़ पर अभियान चलाया गया। इस दौरान बाबूलाल सैनी की पांच दुकानों पर बुल्डोजर चलाया।

यहां पूरन सैनी, और वृद्धा संतो देवी अधिकारियों के सामने गिड़गिड़ाते रहे और दो दिन की मोहलत मांगते रहे, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें हड़काकर भगा दिया। इसके बाद भारी पुलिस बल की मौजूदगी में जेसीबी मशीनों से श्याम सैनी की दुकानों को ढहा दिया गया।
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बीच-बीच में कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। जैसे-जैसे बुल्डोजर आगे बढ़ता गया, दुकान और भवन स्वामियों में हड़कंप मच गया। लोग अपनी-अपनी दुकानों से सामान लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाते दिखे।

प्रशासनिक अधिकारियों ने सुरेश सैनी, सूरज सैनी, बबलू सैनी आदि के अनेक पक्के अतिक्रमणों को ध्वस्त किया। अभियान के दौरान कई पक्के मकान और बाउंड्री भी ध्वस्त की गईं। विप्रा सचिव एसबी सिंह ने बताया कि एनजीटी के आदेश के बाद यमुना खादर डूब क्षेत्र में बिना विप्रा की स्वीकृति के बने सभी निर्माणों को ध्वस्त किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि ध्वस्तीकरण से पूर्व सभी अवैध निर्माण करने वालों को नोटिस देकर 30 दिन का समय दिया गया इसके बाद कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि अभियान आगे भी जारी रहेगा। इस अवसर पर जेई अशोक चौधरी, अमित काद्यान, रूपेश गौड़ आदि मौजूद रहे।


कई लोग हुए बेरोजगार
वृंदावन। प्रशासनिक कार्रवाई से बुधवार को 24 से अधिक लोग बेरोजगार हो गए। परिक्रमा मार्ग में पानी गांव रोड़ से श्याम कुटी की ओर चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान में लगभग 12 दुकानों को ढहाया गया। कई दुकानदार अपना सामान बटोरकर ले गए।

सवाल भी उठते रहे
वृंदावन। बुधवार को परिक्रमा मार्ग में चले अतिक्रमण हटाओ अभियान की पारदर्शिता पर लोग सवाल भी उठाते रहे। आरोप लगाया गया कि ज्यादातर गरीबों के मकान और दुकानें ढहाई गईं, बड़े और पहुंच वाले लोगों के भवन और प्रतिष्ठान को नहीं छेड़ा गया। जबकि कई अतिक्रमण सड़क से लगे हुए हैं।
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