अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का दो दिवसीय राष्ट्रीय प्राध्यापक वर्ग शिविर शनिवार को फोगला आश्रम में शुरू हो गया। इसमें वक्ताओं ने देश में धर्म, संस्कृति और संस्कार आधारित शिक्षा लागू करने पर जोर दिया। इससे पहले शुभारंभ एबीवीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नागेश ठाकुर, महामंत्री हरि बोरकर, राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुनील आम्बेकर ने संयुक्त रूप से भारत माता और स्वामी विवेकानंद के चित्रपट के समक्ष दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण कर किया।
शिविर के प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए एबीवीपी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुनील आम्बेकर ने कहा कि धर्म, संस्कृति, संस्कार आधारित शिक्षा होने से विकास तेजी से होता है। इस बात को हम अंग्रेजों के शासन में भूल गए, क्योंकि पश्चिमी देशों के लोगों ने यहां आते ही धर्म, संस्कृति, संस्कार आधारित चिंतन को नकार दिया और कहा कि यदि विकास चाहते हो तो धर्म को भूल जाओ। अंग्रेजों ने शिक्षा से धर्म को अलग करने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि जो समाज और राष्ट्र विद्यार्थियों का सम्मान करेगा वह सदैव उन्नति के पथ पर आगे बढ़ेगा।
दूसरे सत्र को संबोधित करते हुए एबीवीपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. कैलाश शर्मा ने कहा कि विद्यार्थी चिंतन के आधार पर समाज में बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं। विद्यार्थी देश में विचारक की भूमिका में भी होता है। किसी भी समाज और देश का विकास वहां के विद्यार्थियों और युवाओं की सोच पर आधारित होता है। विद्यार्थी की सोच और चिंतन मजबूत होना चाहिए।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शशिरंजन अकेला ने कहा कि हम विद्यार्थियों को विचार मंथन की अवधारणा से आगे लाना चाहते हैं। आधुनिक शिक्षा में अपनी प्राचीन संस्कृति, संस्कारों, परंपराओं के साथ सनातन धर्म समाहित होना चाहिए। व्यक्ति परिवर्तन से समाज परिवर्तन संभव है। इस विचारधारा को साकार करना चाहते हैं। आज देश में हमारे चिंतन और विचारधारा के अनुरूप व्यवस्थाएं होनी चाहिए।
इस अवसर पर एबीवीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नागेश ठाकुर, सह संगठनमंत्री केएन रघुनंदन, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य राकेश चंद्र चतुर्वेदी, प्रदेश संगठन मंत्री दीपक ऋषी, प्रदेशाध्यक्ष प्रभाष्कर रॉय, प्रदेश मंत्री यशवंत सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष डा. टीपी सिंह, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य शशांक शर्मा, श्रीनिवास, लक्ष्मण, प्रो. मिलिंद मराठे, डा. संजय शर्मा, ममता यादव, धर्मपाल आदि उपस्थित थे।
शिक्षा के व्यापारीकरण के खिलाफ है एबीवीपी: नागेश ठाकुर
एबीवीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नागेश ठाकुर ने पत्रकारों को बताया कि वर्तमान में शिक्षा व्यापार की वस्तु बन गई है। एबीवीपी शिक्षा के व्यापारीकरण के खिलाफ है। हम चाहते हैं कि देश में उच्च शिक्षा सभी का हक होना चाहिए। गरीब से गरीब विद्यार्थी को भी उच्च शिक्षा प्राप्त हो। इसके व्यापक प्रबंध हों।
केंद्रीय और प्रदेश स्तरीय विद्यालयों को आर्थिक सहयोग की व्यवस्था सरकार की ओर से होनी चाहिए। रिक्त पड़े पदों में योग शिक्षकों की भर्ती की जाए। उन्होंने कहा कि जिन बातों से शिक्षा में संस्कार, संस्कृति और धर्म के प्रति बोध हो उन सभी विषयवस्तु को शिक्षा में शामिल किया जाए, तभी व्यक्ति निर्माण से समाज निर्माण की परिकल्पना को हम साकार कर पाएंगे।
उन्होंने बताया कि इस शिविर में देशभर से एबीवीपी के 170 प्राध्यापक कार्यकर्ता विभिन्न विषयों पर आत्मचिंतन करेंगे और देश में नई शिक्षा पद्धति लागू करने के लिए सुझाव देंगे। उच्च शिक्षा में बदलाव के प्रयासों पर देश के 50 क्षेत्रों से शिक्षकों और विद्यार्थियों की परिचर्चा पर डॉक्यूमेंट्री तैयार की जा रही है जिसे आगामी सात और आठ नवंबर को कोलकाता में होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन में भी दिखाया जाएगा।