बंद पड़ी छाता चीनी मिल के शुरू होने से प्रतिदिन 20 हजार क्विंटल गन्ने की पिराई हो सकेगी। ये मिल वर्ष 2008 से बंद पड़ी थी। इसके दोबारा शुरू होने से किसानों को राहत मिलेगी।
मथुरा के छाता में बंद पड़ी चीनी मिल का प्रदेश सरकार ने इस बजट में ध्यान रखा है। मिल को फिर से शुरू करने के लिए 50 करोड़ का बजट जारी किया है।
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छाता चीनी मिल पर 2000 टीसीडी क्षमता (टन प्रतिदिन) यानी 20 हजार क्विंटल गन्ने की पिराई प्रतिदिन होगी। मिल में अब फिर से नई मशीनों को लगाया जाएगा। मिल के अधिकारी ने बताया कि गन्ना बुवाई के लिए किसानों से संपर्क किया जा रहा है।
पुराना 2500 टीसीडी प्लांट 2008 में बंद हो गया है। अब बजट में दोबारा गन्ना मिल को शुरू करने के लिए बजट मिला है। जिला गन्ना अधिकारी ओम प्रकाश सिंह ने बताया कि चीनी मिल को फिर से शुरू करने के लिए बजट में 50 करोड़ की राशि का एलान किया है।
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उन्होंने कहा कि चीनी मिल की क्षमता अभी 2000 टीसीडी होगी, चीनी मिल के संचालन की स्थिति अब साफ हो गई है। मिल के अधिकारियों का कहना है कि पिछले साल 309 हेक्टेयर में गन्ना की बुवाई की गई थी, अब क्षेत्र में रकबा बढ़ाने के लिए किसानों से संपर्क करके बुवाई का लक्ष्य बढ़ा रहे हैं।
भाकियू सुनील के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन चतुर्वेदी ने बताया कि चीनी मिल की क्षमतावृद्धि अच्छा कदम है। चीनी मिल समय से संचालित हो और समय से गन्ना पेराई कर गन्ना मूल्य भुगतान भी समय से करें। यही किसान के लिए अच्छा कदम है। किसान रवि सिकरवार का कहना है कि चीनी मिल की क्षमता वृद्धि होना अच्छी बात है, लेकिन चीनी मिलें गन्ना मूल्य का भुगतान भी समय से करें।