मथुरा। बीएसए (पीजी) कॉलेज की सशर्त अनुमोदित प्रबंध समिति को इलाहाबाद उच्च न्यायालय से कोई राहत नहीं मिली है। न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद याचिका का निस्तारण करते हुए फिलहाल महाविद्यालय में एकल संचालन व्यवस्था को यथावत बनाए रखने का निर्णय दिया है।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति ने 17 अक्तूबर, 2025 को महाविद्यालय की प्रबंध समिति को नौ शर्तों के अधीन सशर्त अनुमोदन प्रदान किया गया था। इसके बाद प्रबंध समिति द्वारा महाविद्यालय प्रशासन, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी, विश्वविद्यालय तथा शिक्षा निदेशक (उच्च शिक्षा) पर वित्तीय अधिकार देने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा था।
इसी दौरान महाविद्यालय के प्रानुशासक डॉ. रवीश शर्मा ने कथित प्रबंध समिति द्वारा की गई गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत संबंधित अधिकारियों से की। शिकायत के आधार पर जांच की प्रक्रिया प्रारंभ हुई और शासन स्तर पर स्पेशल ऑडिट की कार्रवाई भी कराई जा रही है। मामले की जांच के क्रम में एसटीएफ द्वारा भी तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।
जांच लंबित रहने के कारण डॉ. रवीश शर्मा ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिट याचिका संख्या 4266/2026 (डॉ. रवीश शर्मा बनाम राज्य सरकार व अन्य) दाखिल की थी। इस पर न्यायालय ने डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति सहित अन्य प्रतिवादियों को जांच को विधि अनुसार पूर्ण कराने का निर्देश दिया, ताकि मामले के कानूनी परिणाम सामने आ सकें।
इसके बाद सशर्त अनुमोदित प्रबंध समिति के मंत्री धीरेंद्र कुमार अग्रवाल ने रिट याचिका संख्या 9430/2026 दाखिल कर एकल संचालन व्यवस्था समाप्त करने तथा वित्तीय अधिकार देने की मांग की। इस याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की अदालत में हुई।
सुनवाई के दौरान प्राचार्य पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रभाकर अवस्थी और अधिवक्ता रोहित उपाध्याय ने पक्ष रखा। वहीं शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता विनीत कुमार सिंह और अरविंद कुमार तिवारी ने महाविद्यालय में कथित वित्तीय अनियमितताओं तथा जारी जांच का उल्लेख न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने स्पष्ट किया कि संबंधित आदेश को चुनौती दिए बिना याचिकाकर्ता को राहत नहीं दी जा सकती। साथ ही न्यायालय ने अपने पूर्व आदेश का भी संज्ञान लिया। अंततः न्यायालय ने याचिका का निस्तारण करते हुए प्रबंध समिति को कोई तत्काल राहत नहीं दी।