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Mathura News: बिरज में आज जन्मेंगे ब्रजराज बलदेव कुमार

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ब्रजराज श्रीदाऊजी महाराज
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राजेश पाठक
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बलदेव (मथुरा)। श्रीदाऊजी महाराज का जन्मोत्सव आज उल्लासपूर्वक मनाया जाएगा। भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की छठ को बलदेव कुमार का जन्म हुआ था। समाज गायन में बिरज में जन्मे ब्रजराज बलदेव कुमार बधाई हो...आदि गाए जाएंगे।

गर्ग संहिता के बलदेव खंड में शेषावतार श्रीबलदेव के जन्म की कथा है। वसुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी कंस के भय से गोकुल में रहती थीं। भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष षष्ठी को स्वाति नक्षत्र, दिन बुधवार, समय मध्याह्न, तुला लग्र, और पांच ग्रह उच्च स्थित में थे। उस समय रोहिणी के गर्भ से शेषावतार बलदेव अवतरित हुए। उल्लासित मेघों ने जल बरसाए व देवताओं ने पुष्प वर्षा की।
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बलदेव स्थित मंदिर में श्रीबलरामजी की मूर्ति श्रीकृष्ण के पौत्र श्रीब्रजनाभ ने पूर्वजों की पुण्य स्मृति में स्थापित किया था। यह विग्रह द्वापर के बाद भूमिस्थ था। बलदेव में स्थापित मूर्ति कुषाण कालीन है। इसका निर्माण काल तीन सहस्त्र से अधिक है। गोकुल में श्री मद्बल्लभाचार्य महाप्रभु के पौत्र गोस्वामी गोकुलनाथ को बलदेवजी ने स्वप्र दिया।

बताया कि श्यामा गाय जिस स्थान पर दूध स्त्रवित करती है वहां उनकी मूर्ति दबी है। भूमि की खुदाई कर श्री विग्रह को निकालकर श्रीकल्याण देवजी को पूजा-अर्चना के लिए सौंप दिया। मंदिर का भी निर्माण कराया गया। तभी से कल्याण देवजी के वंशज पूजा कर रहे हैं। संवाद


आठ फीट ऊंचा है विग्रह
बलरामजी का विग्रह आठ फीट ऊंचा, साढ़े तीन फीट चौड़ा श्याम वर्ण है। पीछे शेष नाग सातफनों से युक्त छाया कर रहे हैं। विग्रह नृत्य की मुद्रा में है। दाहिना हाथ सिर से ऊपर वरद मुद्रा में है। बायें हाथ में चषक है। विशाल नेत्र, भुजाएं, भुजाओं में आभूषण, कलाई में कडूला उत्कीर्णित है। पैरों में आभूषण, कटि प्रदेश में धोती पहने हैं। मूर्ति के कान में कुंडल, कंठ में बैजंती माला उत्कीर्ण है। सिर के ऊपर के तीन बलय स्पष्ट हैं।
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रामावतार में छोटे भ्राता बने
बलरामजी शेषावतार हैं। रामावतार में वह लक्ष्मण के रूप में श्रीराम के लघु भ्राता बने हैं, तो श्रीकृष्णावतार में श्रीकृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता बलदेव बने हैं। दाऊजी को प्रतिदिन माखन-मिश्री, खीर-पूड़ी, भांग, दूध, पेड़ा का भोग लगता है। मंदिर के पास ही क्षीर सागर है। इसके चारों ओर पक्के घाट हैं। दर्शनार्थी यहां स्नान-आचमन कर पुण्य लाभ कमाते हैं।
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