उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को ब्रज प्लानिंग एंड डेवलपमेंट बोर्ड के प्रस्ताव पर अपनी मोहर लगा दी। बोर्ड के गठन की बुनियाद सबसे पहले अमर उजाला के मुद्दा ब्रज विरासत का गोष्ठी में रखी गई थी। तब से लगातार इसकी प्रक्रिया चलती रही।
गोवर्धन की गोष्ठी में बात और आगे बढ़ी। बीते सप्ताह जतीपुरा में रुद्रकुंड के लोकार्पण समारोह में आए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इसके गठन के संकेत दे भी गए थे। बोर्ड के गठन के साथ ही अब तय हो गया है कि ब्रज के विकास के लिए सभी विभागों को किसी भी कार्य को करने से पहले बोर्ड की स्वीकृति लेनी होगी।
ब्रज प्लानिंग एंड डेवलपमेंट बोर्ड का गठन एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के पैटर्न पर तैयार किया गया है। इसमें मुख्यमंत्री को अध्यक्ष बनाते हुए उनकी गैर मौजूदगी में यह दायित्व मुख्य सचिव को सौंपा गया है। यह बोर्ड मथुरा ब्रज क्षेत्र के डेवलपमेंट के प्लान तैयार करेगा। आवश्यकता होने पर खुद फंड भी जुटाएगा। ब्रज विकास में सहयोग करने के इच्छुक दानदाता बोर्ड के माध्यम से यह कार्य कर सकेंगे।
विधानसभा की स्वीकृति के बाद ब्रज प्लानिंग एंड डेवलपमेंट बोर्ड के अमल में आते ही सरकारी धन की बर्बादी पर रोक लग जाएगी। पिछले सात सालों के दौरान विकास के नाम पर विभिन्न विभागों में तालमेल न होने के कारण धन की बर्बादी जो की है वह अब नहीं होगी। अब ऐसा नहीं होगा कि पहले सड़क बनेगी फिर बिजली और संचार कंपनियों की केबिल डाली जाएगी।
हालांकि, बोर्ड के साथ गोवर्धन तहसील और नगर निगम की भी घोषणा मुख्यमंत्री ने की थी। परंतु मंगलवार को कैबिनेट में इनको स्थान नहीं मिल सका है। गोवर्धन तहसील देने का वायदा तो मुख्यमंत्री ने यह कहते हुए किया था कि मंगलवार को होने जा रही कैबिनेट की बैठक में इसे स्वीकृत कर दिया जाएगा।
अमर उजाला ने की थी पहल
वृंदावन में अमर उजाला की ‘मुद्दा ब्रज विरासत का गोष्ठी’ के दौरान मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष नगेंद्र प्रताप ने प्रभारी मंत्री देवेंद्र गुप्ता की मौजूदगी में ब्रज विरासत को बचाने के लिए ऐसे बोर्ड के गठन की आवश्यकता जताई थी। इसी के बाद जिला प्रशासन के सहयोग से एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के पैटर्न पर प्रस्ताव तैयार कराया गया।
प्रदेश कैबिनेट ने ब्रज प्लानिंग एंड डेवलपमेंट बोर्ड के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। अब विधानसभा में इसे स्वीकृति मिलना बाकी है। बोर्ड के अमल में आने से ब्रज विकास को चार चांद लग जाएंगे।
नगेंद्र प्रताप
उपाध्यक्ष, मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण