रसिया व रास के बीच उड़ते पुष्प, अबीर-गुलाल, लड्डू व चंदन और टेसू के रंगों की बौछार...। हर ओर होली की मस्ती के बीच रसियों की धुन पर नृत्य करते श्रद्धालु। सोमवार को कुछ ऐसा ही दृश्य दिखा महावन के रमणरेती स्थित उदासीन कार्ष्णि आश्रम में कार्ष्णि गोपाल जयंती महोत्सव के अंतर्गत आयोजित होली महोत्सव में। इसी के साथ गुलाल, रंग, लड्डू व फूलों की होली के साथ ब्रज में रंगोत्सव की शुरुआत भी हो गई।
फूलों की होली भी खेली गई।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
होली की शुरुआत आश्रम के पीठाधीश्वर व कार्ष्णि गुरु शरणानंद, कार्ष्णि स्वरूपानंद महाराज, स्वामी हरदेवा नंद, कार्ष्णि नागेन्द्र महाराज ने ठाकुर रमण बिहारी व राधा-कृष्ण के स्वरूपों की आरती उतार की। इसके बाद वृंदावन से आए कलाकारों ने रास किया। विभिन्न प्रकार के अबीर-गुलाल, चंदन व फूलों और लड्डू मार होली खेली गई। इससे पूरा पंडाल रंगमय हो गया। प्रभु के स्वरूपों संग होली खेलकर भक्त भावविभोर हो उठे। कलाकारों ने पनघट लीला, पनघट का उलहाना, दूध का दान, मयूर नृत्य लीला एवं होरी के रसियाओं का गायन हुआ।
जमकर नाचे श्रद्धालु।
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गोपाल ठाकुर व्यास ने बृज की तोय लाज मुकुट बारे चंदा सूरज तेरो ध्यान धरती है ओ प्यारे रसिया..., मत जइयो सखी री सखी री अकेली पनघट पे..., चलिओ आइयो रे श्याम मेरे पनघट पे..., आए हुरियारे होरी कू ग्वालिन निकसो देहरी से नंदगांव के टोल आई गए..., आज होरी खेलन आए रे नटवर नंद किशोर..., बांके बिहारी की बांकी मरोर चित लीनौ है चोर आदि रसियों का गायन किया गया।
भक्तों पर डाला गया रंग।
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इसी बीच कार्ष्णि संतों ने ठाकुरजी के प्रसादी लड्डू श्रद्धालुओं पर लुटाने शुरू कर दिए। भक्त भी इस आनंद को लूटते हुए रमण बिहारी के जयकारे लगाने लगे। महोत्सव में विभिन्न प्रदेशों के श्रद्धालु पहुंचे और भक्तिरस के बीच होली का आनंद लिया। एडीजी अनुपम कुलश्रेष्ठ, डीएम चंद्र प्रकाश सिंह, एसएसपी शैलेश पांडेय भी होली महोत्सव में पहुंचे और पीठाधीश्वर का आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर महामंडलेश्वर श्यामसुंदर दास महाराज, भागवताचार्य रमेश भाई ओझा, कार्ष्णि गोविंदानंद महाराज, कार्ष्णि सर्वज्ञानंद महाराज, कार्ष्णि दिव्यानंद महाराज, कार्यक्रम व्यवस्थापक दिलीप, उमेश जठवानी, चंदर अरोड़ा आदि मौजूद रहे।
अपने आराध्य को साथ लेकर पहुंचे श्रद्धालु।
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20 क्विंटल फूल, अबीर-गुलाल उड़ा, 4 क्विंटल लड्डू भी लुटाए गए
फूलों की होली गेंदा, गुलाब, मोगरा, चमेली, गुलमोहर, चंपा, केवड़ा आदि के 10 क्विंटल पुष्पों का प्रयोग पुष्प वर्षा में किया गया। टेसू के फूलों से बने 20 हजार लीटर रंग, 10 क्विंटल गुलाल-अबीर, दो किलो चंदन, 100 ग्राम केसर से होली खेली गई। इसके साथ ही चार क्विंटल बूंदी के लड्डू लुटाए गए।