मथुरा विकास प्राधिकरण और जल मार्ग प्राधिकरण ने गोकुल से वृंदावन तक यमुना में बोट्स चलाने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। भारतीय अंतरराज्यीय जल मार्ग प्राधिकरण के अध्यक्ष ने ऑनलाइन बैठक में योजना की दिशा तय की है।
भगवान श्रीकृष्ण के गांव गोकुल से बिहारीजी की नगरी वृंदावन तक यमुना जल मार्ग विकसित करने की योजना बनाई गई है। अगले माह मई के अंत तक यमुना किनारे नाविकों में यात्रियों के उतरने चढ़ने तथा विश्राम के लिए उचित व्यवस्था के लिए जेट्टी तैयार किए जाएंगे। इसके लिए एमवीडीए और जल मार्ग प्राधिकरण ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। सोमवार को भारतीय अंतरराज्यीय जल मार्ग प्राधिकरण के अध्यक्ष विजय कुमार की अध्यक्षता में ऑनलाइन बैठक में योजना की दिशा तय कर दी है।
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बैठक में तय किया गया है कि गोकुल से वृंदावन तक 22 किलोमीटर लंबे जल मार्ग में 11 जेट्टी तैयार होंगे। प्रथम चरण में 8 जेट्टी को स्थापित किया जाएगा। इसमें तीन मथुरा और पांच वृंदावन में बनेंगे। जल मार्ग प्राधिकरण के अध्यक्ष विजय कुमार ने बताया कि मथुरा में वेसल (जलयान) को लाना संभव नहीं हो पा रहा है। इसका आकार और दूरी समस्या बन रही है। इसे देखते हुए अब गोकुल और वृंदावन तक फाइवर बोट्स का उपयोग किया जाएगा।
उन्होंने यमुना में कई स्थानों पर कम जल की समस्या पर संयुक्त कमेटी से सर्वे कराने का फैसला किया है। स्थानीय नाविक भी जेट्टी की सुविधाओं का लाभ ले सकेंगे। वहीं उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र ने सोलर, बैटरी, डीजल, पेट्रोल संचालित बोट्स न होना पर जोर दिया। उन्होंने बताया है कि बोट्स संचालन में देवरहा बाबा घाट, केसी घाट के पांटून पुल की समस्या का तकनीकी माध्यम से समाधान निकाला जाएगा।
वहीं सीईओ एसबी सिंह ने बताया है कि जेट्टी के आसपास जनसुविधाएं विकसित की जाएंगी। इस परियोजना पर करीब 28 करोड़ रुपये की लागत आएगी। अंतरराज्यीय जल मार्ग प्राधिकरण तथा एमवीडीए यह कार्य कराएगा। संयुक्त सचिव उत्तर प्रदेश जल मार्ग, पर्यावरण विशेषज्ञ मुकेश कुमार सहित नगर निगम, सिंचाई विभाग व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
खास बिंदु
- 22 किमी लंबी है यमुना जलमार्ग की दूरी।
- प्रथम चरण में मथुरा-वृंदावन में विकसित होंगे 8 जेट्टी, 3 मथुरा और 5 वृंदावन में।
- 28.35 करोड़ की लागत से विकसित होगा जलमार्ग।