अमर उजाला फाउंडेशन की पहल पर शनिवार को महर्षि दयानंद अस्पताल में सिंधी समाज के युवा रक्तदान शिविर का आयोजन कर रहे हैं। इसमें अधिक से अधिक लोगों से रक्तदान कर लोगों की जिंदगी बचाने की मुहिम में शामिल होने का आग्रह किया गया है।
स्वामी लीलाशाह की 136वीं जयंती पर सिंधी जनरल पंचायत ने अमर उजाला की इस अभिनव मुहिम में शामिल होने का निर्णय लिया। रक्तदान शिविर के मुख्य संयोजक चंदनलाल आडवानी और संयोजक किशोर इसरानी ने युवाओं को प्रेरित कर उनका नामांकन प्रारंभ कर दिया है।
महर्षि दयानंद अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. केपी गर्ग ने कहा कि ‘विज्ञान भले ही कितना आगे आ गया हो लेकिन रक्त का विकल्प आज भी नहीं है। ऐसे में रक्तदान से ही लोगों के जीवन की रक्षा की जा सकती है।
ये कहते हैं एक्सपर्ट
- 18 से 55 साल तक की उम्र के लोग कर सकते हैं रक्तदान
- रक्तदान करने के बाद शरीर में किसी प्रकार की कमजोरी नहीं आती
- रक्तदान से पहले होने वाली नियमित जांच से मिलती है स्वास्थ्य की जानकारी
- एक स्वस्थ व्यक्ति तीन महीने में एक बार कर सकता है रक्तदान
- रक्तदान के बाद जारी ब्लड बैंक के डोनर कार्ड का तीन महीने तक कर सक ते हैं प्रयोग