मथुरा/राधाकुंड। करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र गिरिराज जी की धरा पर बृहस्पतिवार अलसुबह से भी भक्तों की भीड़ दिखाई देने लगी थी, हालांकि आस्थावानों के यहां आने का सिलसिला अगले तीन दिन तक चलेगा।
मुडि़या पूर्णिमा मेले का आगाज होने के साथ ही पग-पग पर भक्तों की भावनाएं हिलोर ले रही हैं। सुबह जब परिक्रमा शुरू हुई तो संपूर्ण माहौल राधे-राधे की जयकार से गुंजायमान हो उठा। महिलाओं-बच्चों और बुजुर्गोंं का अपने आराध्य के प्रति उत्साह और श्रद्धा भाव देखते ही बन रहा था। नंगे पांव चल रहे भक्तों को इसका जरा भी अहसास नहीं हो रहा था कि उनके पैरों में कंकड़ भी चुभ रहे हैं। दिनभर बादल छाए रहे, इससे भक्तों को जरा भी परेशानी नहीं हुई। दोपहर बाद घटाएं गहराने लगी और गिरिराज पर्वत हरीतिमा से मुस्कुरा उठा। रिमझिम बारशि होने लगी। यह देख भक्तों का उत्साह और बढ़ गया था। भीगते हुए और राधे-राधे गाते उनके कदम यूंं चल रहे थे मानों स्वयं भगवान गिरिराज उनके साथ हैं और उन्हीं का सहारा है।
कुछ ही देर बाद तेज बारिश शुरू हो गई। इंद्रदेव की कृपा मानकर श्रद्धालु बिना रुके गिरिराजजी की परिक्रमा करते रहे। ऐसा लग रहा था मानो इंद्रदेव भी राधा-श्याम और गिरिराज महाराज की भक्ति में भावुक हो गए हों। पूर्णिमा मेले में अभी वक्त है, लेकिन देवशयनी एकादशी से ही गिरिराजजी की तलहटी पर आस्थावानों का जमावड़ा शुरू हो चुका है।
मानसी गंगा में फव्वारों के नीचे स्नान
मानसी गंगा में फव्वारों के बीच श्रद्धालु स्नान व आचमन कर पुण्य लाभ लेते नजर आए। भक्तों ने परिक्रमा की शुरुआत दानघाटी मंदिर पर मत्था टेककर की। ऐसे में मंदिर पर दिनभर श्रद्धालुओं की भड़ी उमड़ी रही। भक्त आन्यौर, पूंछरी (राजस्थान), जतीपुरा व राधाकुंड होकर पतित पावनी मानसी गंगा पहुंचे और स्नान कर पुण्य कमाया।
उधर, गिरिराज जी पर दूध-भोग चढ़ाकर सेवाभावी भक्तों ने पांडाल लगाकर प्याऊ व भंडारे शुरू कर दिए हैं। प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य शिविर, मोबाइल टाॅयलेट, खोया-पाया कैंप आदि की व्यवस्था की गई है। निजी संस्थाएं भी मेले में स्वास्थ्य शिविर लगाकर सेवा करने में जुटी हैं।
परिक्रमा मार्ग पर भरा पानी
बारिश से मौसम सुहावना हो गया, लेकिन गिरिराज परिक्रमा मार्ग क्षेत्र में पार्किंग स्थलों और कच्चे व पक्के मार्गों में पानी भर गया। गिरिराज परिक्रमा मार्ग के जतीपुरा, आन्यौर, राधाकुंड रामलीला मैदान में जलभराव होने से श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। कच्चे परिक्रमा मार्ग में फिसलन पैदा हो गई। इसके बावजूद भक्तों के कदम नहीं थमे।