मथुरा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गत 20 नवंबर को वृंदावन में ठाकुर बांकेबिहारी कॉरिडोर निर्माण का रास्ता साफ करते हुए देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी राहत दी थी, लेकिन इस आदेश के तीन सप्ताह बाद भी कोई कार्रवाई शुरू नहीं हो सकी है। स्थानीय प्रशासन शासन की गाइडलाइन का इंतजार कर रहा है। कॉरिडोर परियोजना को लेकर अब तक कमेटी का भी गठन नहीं हो सका है। इधर, भीड़ प्रबंधन को लेकर मंदिर के भीतर व बाहर किए इंतजाम भी फेल हो गए हैं। ऐसे में नववर्ष से मकर संक्रांति तक बांकेबिहारी के दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को कैसे काबू किया जाएगा यह बड़ा सवाल है।
कॉरिडोर बिहारीजी मंदिर के सामने 5.65 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित है, जो जमीन की भौगोलिक स्थिति के चलते दो हिस्सों में होगा। इसे विद्यापीठ और परिक्रमा मार्ग से जोड़ा गया है। प्रस्तावित कॉरिडोर में बिहारी जी के भक्तों की प्रत्येक सुविधा का ध्यान रखा गया है। इसमें एक साथ 10 हजार लोग आ सकेंगे। इस पर करीब 505 करोड़ रुपये के खर्च का आकलन किया गया है, जिसके लिए 276 से अधिक दुकानों और मकानों का अधिग्रहण किया जाएगा। इनमें 149 आवासीय, 66 व्यावसायिक व 57 मिश्रित भवन हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद जमीन अधिग्रहण और निर्माणों को ध्वस्त करने की कार्रवाई होनी है, लेकिन अब तक बजट का एक भी हिस्सा शासन ने नहीं भेजा है।
मोबाइल पाउच से लेकर पंजीकरण तक की व्यवस्था ट्रायल तक सीमित
बांकेबिहारी मंदिर में भीड़ प्रबंधन को लेकर वैसे तो पिछले तीन साल में 20 से अधिक प्लान लागू किए जा चुके हैं, जो कि समय-समय पर फेल होते रहे हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर नगर निगम ने श्रद्धालुओं के दर्शन पूर्व ऑफलाइन पंजीकरण व्यवस्था का ट्रायल किया था, लेकिन यह व्यवस्था जमीन पर नहीं उतर सकी है। वहीं, कुछ समय पहले मोबाइल पाउच की व्यवस्था का ट्रायल भी हुआ। इसमें भी आगे कुछ नहीं हुआ है।
बांकेबिहारी कॉरिडोर के संबंध में शासन की ओर से अभी कोई गाइडलाइन नहीं मिली है। गाइडलाइन व बजट मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन आगे की कार्रवाई करेगा। - शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम