बाजना। ब्रज की सदियों पुरानी बलदेव छठ दंगल परंपरा इस वर्ष टूट गई है। बाजना कस्बे में ऐतिहासिक मल्लयुद्ध का आयोजन न होने से स्थानीय लोगों और खेल प्रेमियों में निराशा है। यह आयोजन 112 गांवों की धरोहर और पहचान माना जाता है।
भगवान कृष्ण के बड़े भाई दाऊजी महाराज के जन्मोत्सव पर यह दंगल काफी समय से होता आ रहा है। इसमें हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और पंजाब के पहलवान अपनी ताकत दिखाते थे। व्यापारियों को भी आर्थिक नुकसान हुआ है। यहां लगने वाले मेले से उनकी आजीविका चलती थी। समिति के भीतर आपसी खींचतान को आयोजन रद्द होने की मुख्य वजह माना जा रहा है। बुजुर्ग ग्रामीण महेंद्र सिंह चौधरी, वेदवीर चौधरी, महेश शर्मा, रज्जू पहलवान, अनीश पहलवान, कन्हैया सभासद, देवीराम, राजवीर सूर्यवंशी, देवीराम, हजारीलाल का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में हमेशा यहां दंगल होते देखा है। इस बार परंपरा का टूटना बेहद दुखद है।
पड़ोसी गांवों में धूम
दंगल रद्द होने की खबर से युवा पहलवानों में मायूसी है। एक पहलवान ने कहा, हम साल भर इस मिट्टी पर उतरने की तैयारी करते हैं। बाजना का खिताब जीतना हमारे लिए सम्मान की बात होती है। वहीं, पड़ोसी गांव मानागढ़ी, पारसोली और नौहझील में बलदेव छठ मेले और दंगल धूमधाम से हुए।