मथुरा। धोखाधड़ी के दो मामलों में एडीजे तृतीय राम प्रकाश पांडे की अदालत ने तीन आरोपियों की जमानत को खारिज कर दी। एक आरोपी गायत्री तपोभूमि का मैनेजर है, जिस पर लगभग ढाई करोड़ रुपये गबन का आरोप है। जबकि दूसरा मामला सीआरपीएफ में नौकरी लगाने के नाम पर २५ लाख की ठगी करने का है, जिसमें हरदोई रोड लखनऊ निवासी पिता-पुत्र पर अलग-अलग लोगों से ठगी का आरोप है।
गायत्री तपोभूमि में मैनेजर के पद पर तैनात रहे चंद्रपाल सिंह पुत्र किशोरी लाल निवासी गायत्री निवास बालाजीपुरम थाना हाईवे को संस्थान ने वर्ष २०१३ में नौकरी से निकाल दिया। जिसके बाद संस्थान को पता लगा कि मैनेजर द्वारा परिजन व खुद के खाते में संस्थान के करीब दो करोड़ ४३ लाख रुपये डाले हैं। जिसके बाद गायत्री तपोभूमि के ट्रस्टी मृत्युंजय शर्मा ने थाना गोविंद नगर में चंद्रपाल सिंह के नाम रिपोर्ट दर्ज कराई। ९ जनवरी २०२२ को पुलिस ने चंद्रपाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। चंद्रपाल द्वारा एडीजे-३ की अदालत में जमानत प्रार्थनापत्र दिया। जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।
दूसरी ठगी १८ अगस्त २०२१ की है। हरदोई रोड नवाबगंज लखनऊ निवासी राजेश गुप्ता और उसके पुत्र अभिषेक गुप्ता ने फौज में नौकरी लगवाने के नाम पर त्रिभुवन सिंह पुत्र राजबहादुर निवासी गौतम स्कूल के पास अजय नगर रांची बांगर उसके पुत्र चंद्र प्रताप और पुत्री नेहा से फौज में नौकरी लगवाने के नाम पर लाखों रुपये लिए।
बाद में पता लगा कि राजेश गुप्ता और उसके पुत्र ने फौज में नौकरी लगवाने के नाम पर अन्य लोगों को मिलाकर कुल २५ लाख की ठगी की। इस मामले में मुकदमा दर्ज कर रिफाइनरी पुलिस ने पिता-पुत्र को जेल भेज दिया। बुधवार को एडीजे तृतीय की अदालत ने राजेश गुप्ता तथा उसके पुत्र की जमानत खारिज कर दी। एडीजीसी भीष्म दत्त सिंह तोमर ने बताया कि अदालत ने दो मामलों में तीन आरोपियों की जमानत खारिज की है।