खराब खाने की शिकायत करने वाले यात्री।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बीकानेर की ओर से जा रही प्रयागराज बीकानेर एक्सप्रेस (12403) के बी-2 कोच में मंगलवार को यात्रियों को खराब खाना परोस दिया गया। ट्रेन में सफर कर रहीं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की डायरेक्टर और अन्य यात्रियों की शिकायत के बाद रेलवे ने मामले की जांच शुरू करा दी है। यह हाल तब है जब हाल ही में महाकुंभ को देखते ही रेल यात्रियों को बेहतर खाना देने के निर्देश रेलवे के अधिकारियों ने दिए हैं।
यात्रियों ने की खाने की शिकायत
प्रयागराज बीकानेर एक्सप्रेस (12403) प्रयागराज से चलकर बीकानेर जा रही थी। जैसे ही ट्रेन जंक्शन पर पहुंची तो यात्रियों ने खाने की शिकायत दर्ज कराई। इन यात्रियों में अलवर में तैनात भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की डायरेक्टर शारदा गोयल भी शामिल थीं।
एसीबी डायरेक्टर ने बताया कि उनके साथ ट्रेन में अन्य यात्रियों को खराब खाना मिला तो उन्होंने इसकी शिकायत जीआरपी मथुरा को फोन कर दी। शिकायत मिलते ही जीआरपी की टीम ने ट्रेन में पहुंचकर यात्रियों से जानकारी ली। यात्री राकेश कुमार, कालूराम, दिनेश ने कहा कि ट्रेन आगरा से चली थी तभी उन्होंने भूख लगने पर पैंट्रीकार के वेंडर से खाना खरीदा था। खाना खाने के लिए टिफिन खोला तो उसमें दुर्गंध आ रही थी।
काफी खोजने के बाद भी जो वेंडर खाना देकर गया था उसका पता नहीं चल सका। कोच में सफर कर रहे अन्य यात्रियों ने भी जंक्शन और रेलवे के हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत की है। पीआरओ प्रशस्ति श्रीवास्तव ने बताया कि मामला आईआरसीटीसी से जुड़ा है। फिर भी इस मामले की जांच कराई जा रही है। जांच के बाद कार्रवाई के लिए आईआरसीटीसी को भेजा जाएगा। वहीं जीआरपी थाना प्रभारी यादराम सिंह ने बताया कि महिला यात्री शारदा गोयल ने फोन कर शिकायत की थी कि पैंट्रीकार ने उन्हें खराब खाना दे दिया।
जंक्शन पर 9 माह में खान-पान की 148 शिकायतें
मथुरा जंक्शन पर यात्रियों को कितना शुद्ध खाना मिलता है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 9 माह में इससे जुड़ीं 148 शिकायतें दर्ज हुईं हैं। इन शिकायतों में भोजन पानी नहीं मिलने, खाने की गुणवत्ता, भोजन की मात्रा, अधिक मूल्य लेने, सेवा गुणवत्ता स्वच्छता आदि की शिकायतें शामिल हैं। लगातार खाने पीने की चीजों शिकायतें मिलने के बाद भी रेलवे की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। नतीजतन ऐसे मामलों में सुधार नहीं हो पा रहा है।पीआरओ ने बताया कि प्रत्येक मामले में वरिष्ठ निरीक्षक स्तर से जांच करवाकर अनुबंध के नियमानुसार जुर्माना लगाया है।