चार मई को बहन की शादी थी। सभी तैयारियां बाकी थीं। तो जादोंपुर का उम्मेद सिंह सिकंदराबाद, हैदराबाद से 15 दिन की छुट्टी पर आया था। गेहूं की तैयार फसल से पैसे का इंतजाम होना था। घर से फसल को हुए नुकसान के बारे में बताया तो गया था लेकिन सोचा कि सब थोड़े ही बर्बाद हो गया होगा। परिवार के लोग बताते हैं कि मंगलवार को रात में आया और बुधवार को सुबह होते ही खेत पर चला गया। देखा कुछ नहीं बचा।
देर शाम लौटा तो बहुत गुमसुम था। गुरुवार को सुबह फिर खेत पर चला गया। देर शाम लौटा, खाना भी ठीक से नहीं खाया। बस बहन की शादी के लिए पैसे के इंतजाम की बात करता रहा। तड़के चार बजे परिवारवालों ने देखा तो मौत हो चुकी थी।
उम्मेद के पिता प्रेम सिंह की मौत के बाद वही परिवार में कमाने वाला था। चार साल पहले उसकी आरपीएसएफ (रेलवे प्रोटेक्शन स्पेशल फोर्स) में सिपाही नौकरी लगी तो परिवार के हालात कुछ सुधरे। उम्मेद की तनख्वाह और खेती से मिले पैसे से परिवार का खर्चा सही चल रहा था। भाई मोहन और बहन मीरा की पढ़ाई भी हो रही थी। एक साल पहले उम्मेद की शादी भी हो गई। अब बहन की शादी होने वाली थी तो सोचा छह बीघा में हुई गेहूं की फसल को बेचकर खर्चा पूरा हो जाएगा। अब मां रोती जाती है, बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि ने फसल तो छीनी ही, बेटा भी छीन लिया।
बर्बादी के बाद किसान ने लगाई फांसी
बरसात और ओलावृष्टि से हुई फसलों की बर्बादी के बाद किसानाें की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा। सदमे से जान जाने के मामले रुके नहीं थे कि अब आत्महत्या के मामले सामने आ रहे हैं। चौमुंहा में किसान शिशुपाल के आत्मदाह के बाद नंदगांव में किसान रणवीर (30) ने गुरुवार को रात में फांसी लगाकर जान दे दी।
नंदगांव के नाहर सिंह मोहल्ला निवासी रणवीर पुत्र लच्छो अपने दो बेटे प्रिंस और हनी व पत्नी कल्पना के साथ बेहद खुश थे। हाल ही में हुई ओलावृष्टि के बाद उनकी फसल भी तहस नहस हो गई। इस नुकसान से रणवीर का मनोबल टूट चुका था। कल्पना ने भी पति को बहुत समझाया। बताया गया है कि गुरुवार को रणवीर ने पूरे दिन खेतों में काम किया। शाम घर में जब सभी सो गए तो आधी रात में रणवीर ने पंखे से लटक कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। सुबह पत्नी ने दृश्य देखा तो चीख पुकार मच गई। मौके पर मौजूद सपा नगर अध्यक्ष दानबिहारी चौधरी, भाई हरी सिंह आदि ने बताया कि रणवीर कई दिनों से परेशान थे। वह खेती से बचे समय में ड्राइवरी करते थे और लोगों से उधार लिए रुपये चुकाना चाहते थे। उन पर करीब डेढ़ लाख रुपये कर्ज है। हिस्से में डेढ़ बीघा जमीन थी जिसमें गेंहू की फसल उगा रखी थी। ओलावृष्टि ने उनके सपने चकनाचूर कर दिए।
सदमे से मरी वृद्धा
चार एकड़ फसल में 40 मन गेहूं देख वृद्धा को ऐसा सदमा लगा कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया। नाहर सिंह मोहल्ला निवासी शिशुपाली पत्नी नत्थी (65) के बेटे महेंद्र और देशराज गुरुवार को फसल लेकर घर आए। शिशुपाली ने कम गेहूं देख बेटों से प्रश्न किया कि और गेहूं कहां हैं? इस पर महेंद्र और गोपाल ने बताया कि मां चार एकड़ में मात्र 40 मन गेहूं ही हुए हैं। बताया गया है कि शिशुपाली इतना सुनते ही लड़खड़ा गईं। बेटों ने स्थानीय चिकित्सक को बुलाया तो चिकित्सक ने प्राथमिक उपचार के बाद कोसी ले जाने की सलाह दी। मगर वृद्धा ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। बेटे महेंद्र सिंह ने बताया कि क्रॉप लॉन और बच्चों की फीस को लेकर मां बेहद चिंतित रहती थीं।