वहीं उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एसबी सिंह ने मथुरा में एमएसएमई की अपार संभावनाएं होने की बात कही। उन्होंने कहा कि मथुरा में देश भर से 9 करोड़ श्रद्धालु आते हैं, जिससे मथुरा एक पर्यटन हब बन गया है। उन्होंने कहा कि वृंदावन में करीब 80 करोड़ की लागत से पोशाक केंद्र बनाया जा रहा है, जो पोशाक के कारोबार को नई उड़ान देगा। उन्होंने कहा कि मथुरा के लिए सरकार ने हाल ही में 30 हजार करोड़ का प्लान तैयार किया है। इससे विभिन्न क्षेत्रों में विकास की संभावनाओं को मूर्त रूप देन का काम किया जाएगा। उन्होंने उद्यमों की स्थापना में एमवीडीए से संबंधित समस्याओं के निराकरण की भी बात कही।
नेशनल चैंबर के पूर्व अध्यक्ष राजेश बजाज ने कहा कि मथुरा का साड़ी उद्योग वर्तमान में भी करीब एक लाख लोगों को रोजगार मुहैया करा रहा है। उन्होंने साड़ी सहित अन्य उद्योगों के सामने आ रहीं समस्याओं को सिलसिलेवार ढंग से रखा। बताया कि सरकार जब उद्योगों को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत है तो सरकारी मशीनरी को भी उदारता दिखानी होगी। एमएसएमई कोर्ट की संख्या बढ़ाने की जरूरत भी है।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष आरपी सिंघल ने कहा कि 1972 और वर्तमान टेक्नोलॉजी में जमीन-आसमान का अंतर आ चुका है। सरकार युवाओं के रोजगार के लिए लोन की व्यवस्था करती है, लेकिन बैंक धनराशि को घटाकर इतना कम कर देता है कि कोई उद्योग लग ही नहीं सकता। औद्योगिक क्षेत्रों में पीने के पानी तक की सुविधा नहीं है। भूमाफिया उद्योगों के लिए आवंटित जमीनों पर कब्जा करके बैठे हैं। समस्याओं के बाद भी उद्यमी देश की जीडीपी में अपना योगदान दे रहे हैं।
इंडियन बुलियन एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र अग्रवाल हाथी वाले ने कहा कि वर्तमान में उद्योगपतियों के लिए कदम-कदम पर समस्याएं हैं। जरा सी कमी मिलने पर उद्यमी के खिलाफ कार्रवाई में देर नहीं लगती, मगर यमुना में नाले गिरें या कोई सरकारी मशीनरी की कमी हो तो कोई देखने वाला नहीं है। मथुरा के उद्यमियों को नए अवसरों के साथ सुविधाएं भी मिलनी चाहिए।
टोंटी एसोसिएशन के देवेंद्र कुमार ने कहा कि उद्योगों के लिए सबसे बड़ा रोड़ा टीटीजेड ने अटका रखा है। 40 साल पुराने कानून उद्यमियों के लिए नासूर बने हुए हैं। विभागीय अधिकारियों को सरकार और कोर्ट को बताना होगा कि पूर्व और वर्तमान की स्थिति में जमीन आसमान का अंतर आ चुका है। गैस और बिजली से चलने वाले उद्योग लगाने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन इसके लिए विभागीय अनुमति नहीं मिलती है।
लघु उद्योग भारती के मंडल सचिव सोनल अग्रवाल ने कहा कि लघु उद्योग भारती की 600 जिलों में इकाई हैं। 2047 विकसित भारत का सपना मथुरा के विकास के साथ ही पूरा हो सकता है। मथुरा में सबसे ज्यादा श्रद्धालु आते हैं, लेकिन सुपरफास्ट ट्रेनों के ठहराव का अभाव है। मथुरा में इलेक्ट्रॉनिक आइटम का हब बनना चाहिए। ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण की बहुत आवश्यकता है।
यह निकले मंथन के मोती
- टीटीजेड में व्हाइट कैटेगरी में भी रोक हटाई जानी चाहिए।
- टीटीजेड की बदले परिदृश्य के मुताबिक समीक्षा की महती आवश्यकता।
- एक जिला, एक उत्पाद की निर्माण इकाइयों को मिलें विशेष सुविधाएं।
- एमएसएमई उद्यमियों को लोन, एनओसी की समस्याओं का त्वरित निस्तारण हो।
- औद्योगिक इलाकों में सड़क, पानी, बिजली जैसी सुविधाओं के लिए अलग बजट हो।
- उद्योग बंधु की बैठकों में रखी जाने वाली समस्याओं का समाधान प्रभावी तरीके से हो।
- एमएसएमई के लिए महिला उद्यमियों को भी बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त सुविधाएं मिलें।
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