मथुरा। सोने-चांदी की चमक ने रियल एस्टेट कारोबार की चाल बिगाड़ दी है। सोने-चांदी की कीमतों में उछाल आने के बाद कारोबारी रियल एस्टेट की बजाय सराफा बाजार में निवेश कर रहे हैं। इसका असर जमीन और फ्लैटों की खरीद-फरोख्त पर भी पड़ रहा है। निवेशक अब नई परियोजनाओं से किनारा कर रहे हैं।
कारोबारियों की मानें तो रियल एस्टेट में एक बार निवेश करने पर कई सालों बाद मुनाफा मिलता है, लेकिन सराफा बाजार में निवेश करने पर बहुत ही कम समय में इसका परिणाम सामने आ जाता है। यही कारण है कि निवेशक अब संपत्ति बुक करने के बजाय अपना सरप्लस फंड सराफा कारोबार में निवेश कर रहे हैं। इस बदलाव से छोटे और मध्यम स्तर के बिल्डर अधिक प्रभावित हो रहे हैं। वह नई परियोजनाओं में निवेश करने से कतरा रहे हैं।
यदि सराफा बाजार की यही तेजी जारी रही, तो आने वाले समय में रियल एस्टेट क्षेत्र को बड़े वित्तीय सुधारों और सरकारी प्रोत्साहन की आवश्यकता होगी, ताकि निवेशकों का भरोसा टिका रहे। फिलहाल ईंट-पत्थर के बजाय पीली धातु की चमक निवेशकों की पहली पसंद बनी हुई है।