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Mathura News: गंगाजल परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोप, लीकेज से व्यर्थ बह रहा पानी

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- पार्षदों ने कहा, एक साल भी नहीं टिक सकी पाइपलाइन
- 16 जनवरी 2023 को जलकल विभाग के सुपुर्द की गई थी परियोजना

संवाद न्यूज एजेंसी


मथुरा। मथुरा पुनर्गठन पेयजल योजना थ्रू गोकुल बैराज (गंगाजल प्रोजेक्ट) के तहत डाली गई पाइपलाइन शहर में जगह-जगह लीक हो रही है। सड़कों पर गंगाजल व्यर्थ बह रहा है। जबकि इस परियोजना के पहले चरण के कार्य को पूरा हुए एक साल भी नहीं बीता है। चार इंच की पाइपलाइन के एक लीकेज पर 4500 रुपये और 24 इंच पाइपलाइन के लीकेज पर 20 हजार रुपये करीब का खर्चा आ रहा है। पार्षदों ने आरोप लगाया है कि पानी की तरह जनता का पैसा बहाया जा रहा है। परियोजना में जिम्मेदारों ने घटिया पाइपलाइन का इस्तेमाल कर खूब भ्रष्टाचार किया है, जो कि अब सामने आ रहा है।
गंगाजल परियोजना के जरिये मथुरा शहरी क्षेत्र के लोगों को पीने के लिए शुद्ध मीठा जल उपलब्ध कराने का दावा किया गया। केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर इस प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारा। आगरा के लिए गंगाजल की सप्लाई लेकर जा रही पाइपलाइन से जोड़कर बलदेव से मथुरा के लिए एक लाइन डाली गई। जल निगम की देखरेख में आगरा की फर्म एसएम कंस्ट्रक्शन के द्वारा यह कार्य किया गया। 2018-19 में शुरू हुआ यह कार्य 30 नवंबर 2021 को पूरा हुआ। 28 फरवरी 2022 से एसएम कंस्ट्रक्शन ने ट्रायल रन शुरू किया। छह माह तक ट्रायल करने के बाद 16 जनवरी 2023 को प्रोजेक्ट को नगर निगम के जलकल विभाग को सुपुर्द कर दिया। पूर्व पार्षद हेमंत अग्रवाल ने बताया कि साल भी नहीं बीता है कि शहर की सड़कों पर जगह-जगह गंगाजल लीकेज के मामले सामने आने लगे हैं। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि इतनी घटिया पाइप लाइन क्यों डाली गई, जो कि एक साल भी महज 25 एमएलडी पानी सप्लाई का दबाव नहीं झेल पा रही है।
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घटिया पाइपलाइन की क्यों की गई अनदेखी
पूर्व पार्षद राजेश सिंह पिंटू ने सवाल खड़ा किया है कि घटिया पाइप लाइन को आखिर अधिकारियों द्वारा क्यों मंजूरी दी गई। मामला साफ है कि इसमें भ्रष्टाचार हुआ है। अब इसकी पोल सबके सामने खुल रही है। चार इंच की पाइप लाइन के एक लीकेज को ठीक करने में 4500 रुपये और 24 इंच की पाइप लाइन के लीकेज को ठीक करने में 15 से 20 हजार रुपये का खर्च आता है। अब तक 100 से अधिक लीकेज हो चुके हैं। नगर आयुक्त को यह बताना चाहिए कि यह पैसा, जो खर्च किया जा रहा है, इसकी एवज में किस विकास कार्य में कटौती की जा रही है।

इन क्षेत्रों में पहले चरण में डाली गई थी पाइप लाइन: चंद्रपुरी, धौली प्याऊ, नटवर नगर, द्वारिकापुरी, वेस्ट प्रताप नगर, शांति नगर, बलदेव पुरी, राधिका विहार

-गंगाजल प्रोजेक्ट को गलत तरीके से हैंडओवर किया गया है। जगह-जगह लीकेज हो रही है। घटिया पाइप लाइन का इस्तेमाल किया गया है। जिम्मेदारों ने मिलकर भ्रष्टाचार किया, जिसकी गवाही लीकेज दे रहे हैं।
- रेनू तिलकवीर चौधरी, पार्षद 47-वार्ड

गंगाजल प्रोजेक्ट के तहत डाली गई पाइप लाइन में जगह-जगह हुए लीकेज को ठीक करने पर नगर निगम ने जनवरी 2023 से अब तक कितना रुपया खर्च किया। इसका ब्योरा पेश करना चाहिए।
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- तेजवीर, पार्षद वार्ड-54

आंकड़ों पर एक निगाह
गंगाजल प्रोजेक्ट प्रथम चरण

2018-19 में कार्य शुरू हुआ
74 किमी पाइपलाइन शहर के 10 वार्डों में डाली गईं
11238 घरों को कनेक्शन दिए गए
25 एमएलडी गंगाजल की आपूर्ति की जा रही है
29 करोड़ रुपये प्रथम चरण पर खर्च हुए
गंगाजल प्रोजेक्ट द्वितीय चरण
69 किमी पाइपलाइन डालना प्रस्तावित
60 किमी पाइपलाइन डाली जा चुकी है
9 हजार घरों को कनेक्शन देने हैं
35 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है

पेयजल व्यवस्था पर 7-8 लाख रुपये हर माह खर्च कर रहे हैं। इसमें 429 पंपसैट का रखरखाव कार्य भी शामिल है। गंगाजल परियोजना के तहत डाली गई पाइप लाइन में लिकेज की शिकायत आना सही बात है। भ्रष्टाचार की बात योगी राज में सही नहीं है।
- विनोद अग्रवाल, मेयर
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