आखिर कब तक भारत पड़ोसी पाकिस्तान के सामने दोस्ती का हाथ बढ़ाता रहेगा। अब तो सीधा हमला होना चाहिए। शहीदों की पत्नियों का कहना है कि सरकार उनके हाथ में हथियार दे। वह पाकिस्तान में घुसकर आतंकियों की गर्दन काट लाएंगी। कम से कम आगे को तो किसी जवान का परिवार नहीं उजड़ेगा।
आठ जनवरी 2013 को जम्मू में शहीद हुए कोसीकलां के गांव शेरनगर निवासी हेमराज की पत्नी धर्मवती का कहना है कि तमाम सैनिक शहीद हो रहे हैं, लेकिन सरकार कोई एक्शन नहीं ले रही। आखिर कितने जवानों को शहीद कराएंगे। अब तो भारतीय सेनाएं पाकिस्तान में घुसकर आतंकवादियों का सफाया करें। सेना पर हुए हमले से खफा धर्मवती कहती हैं, मुझे कोई अनुमति दे दे तो मैं पाकिस्तान में जाकर आतंकवादियों की गर्दन काट लाऊं।
30 जुलाई 2016 को जम्मू में शहीद हुए झंडीपुर निवासी बबलू कुमार की पत्नी रविता देवी भारी गुस्से में हैं। कहती हैं, आखिर कितने जवानों को शहीद कराएंगी हमारी सरकारें। आतंकवादी अटैक पर अटैक किए जा रहे हैं और हम खामोश हैं। इससे सेना का मनोबल गिर सकता है। अब तो भारतीय सेना को छूट दे दी जाए कि वह पाकिस्तान में जाकर आतंकियों का सफाया करे। यदि सरकार हमें मौका दे तो एक-एक आतंकी का सफाया कर दें।
28 अक्तूबर को 2015 को जम्मू में शहीद हुए गोवर्धन के गांव भवनपुरा निवासी समोद कुमार की पत्नी सीमा चौधरी का कहना है कि खून का बदला खून होना चाहिए। आतंकियों ने हमारे जितने जवानों को मारा है उससे दोगुना आतंकियों को घुसकर मारा जाए। वह कहती हैं कि यदि सरकार उन्हें सीमा पर भेज दे तो वह पाकिस्तान में चल रहे आतंकियों के कैंप को खत्म कर दें। 1999 में कारगिल में शहीद हुए गोवर्धन नगरिया निवासी सोरन सिंह की पत्नी कमलेश देवी सेना पर हुए आतंकी हमले से भारी क्रोध में हैं।
कहती हैं, आखिर कब तक जवानों का बलिदान होता रहेगा। अब तो जवानों को छूट मिल जानी चाहिए। वह पाकिस्तान में घुसकर आतंकियों को चुन चुनकर मारें, ताकि किसी जवान की पत्नी विधवा न हो और बच्चे अनाथ न हो।
हेमराज की गर्दन काट ली थी आतंकियों ने
कोसीकलां के गांव शेरनगर निवासी हेमराज की आतंकियों ने गर्दन काट ली थी। उनके साथ कई दूसरे जवानों पर भी दहशतगर्दों ने हमला किया था। इनके परिवार वाले कहते हैं कि गर्दन के बदले तो गर्दन ही होनी चाहिए।