विश्व प्रसिद्ध ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर की प्रबंध कमेटी में महिलाओं को किसी भी प्रकार के अधिकार प्राप्त नहीं है। सेवायतों के परिवार की महिलाओं को ठाकुरजी के सेवाधिकार, प्रसाद, पारस और वोट देने का भी अधिकार नहीं है, जबकि भारतीय संविधान के अनुसार महिलाओं को पुरुष के समान अधिकार हैं।
हरिदास बिहारी फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष और ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत प्रह्लाद वल्लभ गोस्वामी ने इस असामान्यता को मिटाने के लिए न्यायालय की शरण लेने की बात कही है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1939 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देशन में तैयार की गई मंदिर की स्कीम में भी विशेष परिस्थितियों में सेवायत परिवार की महिलाओं के अधिकार घोषित किए गए हैं।
अब तक मंदिर की स्कीम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। नतीजन आजतक गोस्वामी समाज की महिलाएं अपने मूलभूत अधिकारों से वंचित हैं।
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर प्रबंध कमेटी के चुनावों से जुड़ा एक पहलू यह भी है कि मंदिर प्रबंध कमेटी के चुनावों में सेवायत परिवारों की सामान्य महिलाओं को मतदान का कोई अधिकार प्राप्त नहीं है।
विशिष्ट परिस्थितियों में केवल ऐसी विधवा महिलाओं को ही वोट डालने का अधिकार है जिनके उत्तराधिकारी नाबालिग हैं। मंदिर प्रबंध कमेटी में महिलाओं के प्रतिनिधित्व का भी कोई प्रावधान नहीं है।