वृंदावन। पानीघाट स्थित मलूक पीठ गोशाला में बुधवार को ऋषि पंचमी महोत्सव मनाया गया, जिसमें देशभर से आए संत महंतों ने वैदिक विधिविधान से सप्तऋषि पूजन कर सनातन धर्म के उत्थान का संकल्प लिया।
महोत्सव का शुभारंभ गुरु शरणानन्द महाराज, विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक दिनेशजी, मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास देवाचार्य महाराज ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। वराह पीठाधीश्वर राम प्रवेश देवाचार्य ने ऋषि पूजन के महत्व पर प्रकाश डाला। नाभा पीठाधीश्वर सुतीक्ष्ण दास देवाचार्य ने मलूक पीठाधीश्वर की गो सेवा, जीवों के प्रति सहिष्णुता का भाव होने को वैष्णवों एवं संत समाज के लिए अनुकरणीय बताया।
बड़े दिनेशजी ने मंहत राजेंद्र दास महाराज को उनके जन्मदिन पर अयोध्या में निर्माणाधीन मंदिर की कृति भेंट की। उन्होंने सप्तऋषि कल्पों के पूजन की परंपरा के पुनर्जीवित किए जाने को सभी सनातनियों के लिए गौरव का क्षण बताया और कहा कि 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर निर्माण में भगवान राम जानकी का प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव होगा। गुरु शरणानंद महाराज ने कहा शास्त्रों के अनुसार जो भी पृथ्वी पर जीवन लेता है उसे तीन ऋणों का ऋणभार उतारने पर ही मुक्ति मिलती है। इन तीन ऋणों में पितरों का ऋण, देवताओं का ऋण एवं तीसरा ऋषि ऋण होता है।
ऋषि कल्पों के रूप में संतों का किया पूजन
सप्त ऋषि कल्पों के रूप में राम जन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, न्यास के कोषाध्यक्ष गोविन्द गिरी महाराज, संत रमेश बाबा, महंत लाड़ली शरण महाराज, देवाचार्य किशोर देव दास जू महाराज, रामकुंज अयोध्या के रामानंद दास, देवाचार्य सुतीक्ष्ण दास महाराज का पूजन मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास महाराज ने किया। इस अवसर पर बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज, रसिक माधव दास, धूनी वाले बाबा, ब्रह्मचारी दिव्य स्वरूप महाराज, रसिया बाबा, कन्हैया लाल सुपारी वाले आदि मौजूद रहे।