जवाहर बाग में पुलिस कार्रवाई के 72 घंटे बाद भी जमीन पर पड़े झोपड़ियों आदि के मलबे से उठता धुआं, कोयला बन चुके वृक्षों के तने, जमीन पर पड़े अधजले फल इसकी बर्बादी की कहनी बयां कर रहे थे। दो जून को पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने जवाहर बाग को कब्जाधारियों से मुक्त कराने के लिए कार्रवाई की गई थी।
पुलिस कार्रवाई के लगभग 72 घंटे बाद पांच जून को जवाहर बाग को मीडिया के लिए खोल दिया गया। यहां वर्षों मेहनत कर सहेजे गए पेड़-पौधे और फलदार वृक्षों के बाग उजड़ चुके हैं। बहुत से पेड़-पौधे जल चुके हैं और कई पेड़ नीचे गिरे पडे़ हैं। पेड़ों को काटकर उन पर मचान और झूले लगाए गए थे।
जवाहर बाग की हरियाली को खत्म कर उसके पेड़ काट दिए गए, ताकि रामवृक्ष के एक इशारे पर मरने-मारने को तैयार उसकी सेना के लिए भोजन पकाने के ईंधन का इंतजाम हो सके। यहां सिंचाई के लिए बनी पक्की नालियों को उखाड़कर दीवार बना दी गई थी। सनकी रामवृक्ष के निर्देशन में सरकारी आवासों पर कब्जे के बाद उनमें अपने हिसाब से बदलाव किए गए थे।