जवाहर बाग में कब्जा जमाए बैठे लोगों का नेतृत्व करने वाले रामवृक्ष का बेडरूम किसी राजा से कम नहीं था। उसने जिला उद्यान अधिकारी को भगाकर उनके आवास पर कब्जा कर लिया था। इस आवास को उसने अपनी आरामगाह बना लिया था। यहां उसके लिए स्वीमिंग पूल का भी प्रबंध था।
14 मार्च 2014 को जवाहर बाग पर कब्जा जमाया गया था। जो दो जून, 2016 को पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई के बाद हट सका। करीब ढाई वर्ष के कब्जे के दौरान रामवृक्ष यादव के नेतृत्व में कब्जाधारियों ने सरकारी अधिकारियों के कार्यालय और आवासों पर भी कब्जा कर लिया था।
रामवृक्ष यादव ने जिला उद्यान अधिकारी का आवास अपने रहने के लिए चुना था। आवास में बने बेडरूम में सभी आधुनिक सुविधाएं थीं। एसी लगा था। डबल बेड पर अच्छी कंपनी के गद्दे पडे़ हुए थे। ड्रेसिंग टेबिल पर ब्रांडेड तेल, डियो और परफ्यूम सजे हुए थे। बेडरूम में कई तरह के अचार के पांच-पांच किग्रा के बडे़ डिब्बे भी रखे हुए थे। रसोई घर भी सजा हुआ था। यहां माइक्रोवेव ओवन सहित अन्य इलैक्ट्रॉनिक उपकरण भी थे।
स्वीमिंग पूल में नहाता था
आवास के बाहर अपना स्वीमिंग पूल तैयार कर रखा था। यहां चौकोर गड्ढा बनाकर उसने ईंटों का फर्श और दीवार बनाई थी। इसके बाद इसे पूरी तरह तिरपाल से ढक दिया था।
जिम का सामान भी था मौजूद
आवास में जिम भी बनाया हुआ था। इस जिम में तीन ट्रेड मील, एक साइकिल, कुछ डंबल रखे हुए थे। आवास पर पहले झूले और छतरियां पहले से ही लगे थे। इनका भी प्रयोग किया ही जाता था।
खुला जवाहर बाग तो दिखा रामवृक्ष का साम्राज्य
मथुरा। रविवार को जब जवाहर बाग खुला तो यहां रामवृक्ष का पूरा साम्राज्य दिखा। यहां एक पूरा शहर बसा लिया गया था। चार जून के संस्करण में ‘अमर उजाला’ ने इस बारे में इंगित (कब्जाधारियों ने जंगल में बसा रखा था पूरा शहर) किया था लेकिन ये बढ़कर ही निकला। यहां शापिंग कांप्लेक्स, ब्यूटी पार्लर, गैस एजेंसी, गैराज, छोटी बड़ी दुकानें, शानदार आफिस, बड़ी आटा चक्की और जिम थी।
जवाहर बाग में रविवार को खोला गया तो बाग में बसा शहर सबके सामने आया। बाग में तीन हजार लोगों के ठहरने की समुचित व्यवस्था कर ली गई थी। रोजमर्रा का सामान खरीदने को दुकानें बनी थीं। एक बड़ी सामूहिक रसोई थी। इसमें पांच सौ लोगों का खाना एक साथ बन सकता था।
एक ट्रेनिंग सेंटर भी था। यहां से अधजली जो किताबें मिली हैं उससे साफ है कि यहां बच्चों को सिस्टम के खिलाफ तैयार किया जा रहा था। पानी के लिए आरओ की व्यवस्था थी। दो बड़ी चक्की थीं, जहां गेहूं और दाल की पिसाई की जाती थी।
चक्की के पास भारी मात्रा में जला गेहूं और चावल भी मिला है। गैस एजेंसी भी बनाई हुई थी। इसमें 200 से ज्यादा गैस के सिलेंडर मिले हैं। गाड़ियों का भी एक शोरूम बाग में मिला है। जवाहर बाग हिंसा की जांच कर रहे अलीगढ़ के कमिश्नर चंद्रकांत ने भी पूरे बाग को करीब से देखा। वह भी हैरान रह गए।