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Mathura News: 15 साल बाद बेटे से मिली तो दोनों के छलकें आंसू

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वृंदावन। अपना घर आश्रम में बृहस्पतिवार को एक भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला। 15 वर्ष से बिछड़े पुत्र को स्वस्थ एवं सुरक्षित देखकर मां-बेटे की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। कभी बेटे ने मां के आंसू पौंछे तो कभी मां ने बेटे के। मां अपने खोए हुए बेटे को निहारती रही और भावनाओं पर काबू नहीं रख सकी। बोलीं ठाकुरजी नया जीवन दे दिया।
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आश्रम के अध्यक्ष धन्नाराम जांदू ने बताया कि हरीश वर्ष 2015 में नाबालिग के रूप में गया रेलवे स्टेशन पर मिला था। उसे बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) द्वारा रेस्क्यू कर जिला बाल कल्याण समिति, गया में रखा गया। इधर परिजन ने उसकी तलाश की लेकिन कोई सुराग नहीं लग सका। बाद में हरीश को लखनऊ और फिर उसे अपना घर आश्रम भरतपुर भेजा गया। जहां से वर्ष 2021 में हरीश को वृंदावन स्थित अपना घर आश्रम भेज दिया गया। आश्रम के चिकित्सक डॉ. रंजीत चौधरी के इलाज से ठीक हुए हरीश ने परिजन का पता बताया। पता चला कि उसके पिता पंजाब के फाजिल्का जिले के गांधी नगर क्षेत्र में स्थित एक बिस्कुट फैक्ट्री में कार्यरत हैं। 13 दिसंबर 2025 को परिजन वृंदावन पहुंचे और पहचान प्रक्रिया पूरी की। जैसे ही मां सकुना ने अपने बेटे हरीश को देखा, वर्षों का बिछोह पल भर में आंसुओं में बदल गया।
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