उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम और उद्यमियों की शिकायत के बाद शनिवार को प्रशासन का महाबली झुग्गी-झोपड़ी पर जमकर दौड़ा। कुछ प्लाट तो कुछ रास्तों पर बनी झोपड़ियों को तहस-नहस कर दिया गया।
शहर में अवैध निर्माण और अतिक्रमण की गंभीर समस्या को छोड़कर शनिवार को प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान अचानक औद्योगिक क्षेत्र की ओर चला गया। यहां औद्योगिक इकाइयों के आसपास खोखा लगाकर गुजर करने वाले मजदूर या फिर तिरपाल डालकर जिंदगी गुजारने वालों को हटाया गया।
लोगों ने आपत्ति जताई तो कहा गया कि इससे यातायात में लोगों को सुविधा होगी। ऐसे में हटाए गए लोगों के लिए वैकल्पिक स्थान दिए जाने की वकालत की गई।
इधर शहर में हालात जस के तस हैं। शहर में स्थायी अतिक्रमण और अवैध निर्माण की बाढ़ आ गई है। बगैर नक्शा और निर्धारित नक्शे को दरकिनार करते हुए बहुमंजिला निर्माण किए जा रहे हैं। इसकी ओर किसी का ध्यान नहीं है। यहां तक कि शहर के मुख्य मार्गों पर दुकानदारों ने कब्जा कर रखा है। इसे हटाने की जहमत प्रशासन के साथ पालिका भी नहीं जुटा पा रही है।