पुरी के शंकराचार्य स्वामी अद्योक्षजानंद देवतीर्थ ने कहा कि घाटी में मजहबी लड़ाई नहीं है वहां के नागरिक मानवाधिकार और संवैधानिक अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। कश्मीर समस्या के समाधान पर पीएम मोदी के चर्चा करने संबंधी बयान का स्वागत करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि कश्मीर समस्या के समाधान के लिए वहां की मूलभूत समस्याओं को समझना होगा। इसके लिए वर्ष 1947 के हालातों का अध्ययन करना आवश्यक है।
गिरिराज परिक्रमा मार्ग स्थित शंकराचार्य आश्रम पर अमर उजाला से वार्ता में शंकराचार्य अद्योक्षजानंद देवतीर्थ ने कहा कि जम्मू कश्मीर मुस्लिम बहुल राज्य है और वहां हिंदू भी निवास करते हैं। पाकिस्तान निर्माण के समय वहां के लोगों पर पाकिस्तान जाने या हिंदुस्तान में रहने के विकल्प थे, लेकिन कश्मीर के नागरिकों ने मजहबी आधार पर बने देश पाकिस्तान का तिरस्कार कर धर्म निरपेक्ष देश हिंदुस्तान में रहना स्वीकार किया। कश्मीरी आज भी धर्म निरपेक्ष हैं।
उन्होंने कहा कि कश्मीर की समस्या मजहबी नहीं राजनीतिक है, समाधान भी राजनीतिक सूझबूझ से ही होगा। उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री बयानों के योद्धा हैं, कार्य में जीरो हैं। दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी सेना होने पर भी सीमा पार से घुसपैठिए नहीं रोक पा रहे हैं। अपितु सैन्य बलों का प्रयोग अपने देश के लोगों को रोकने में ही प्रयोग कर रहे हैं। पीएम मोदी को बातचीत के जरिए हुर्रियत, कश्मीरी पंडितों और राजनीतिक दलों को शामिल रख कर सकारात्मक प्रयास करने चाहिए। लोकतंत्र में पीएम को अपने नागरिकों की बात सुनने का अधिकार है।