श्री कृष्ण बलराम मंदिर से निकाली गयी शोभायात्रा में शामिल झांकियां
वृंदावन। श्री कृष्ण बलराम मंदिर (इस्कॉन मंदिर) में 50 वीं वर्षगांठ पर महा हरिनाम संकीर्तन के माध्यम से भक्तों को निहाल किया। भक्तों ने भक्ति के समुद्र में डुबकी लगाई। सड़कों पर गूंज रहे संकीर्तन में भक्तों ने साथ मिलकर भक्ति भाव से हरिनाम की महिमा का गुणगान किया।
कार्यक्रम की शुरुआत श्री कृष्ण बलराम सहित अन्य देवी देवताओं पर पुष्प अभिषेक से हुई। फिर संकीर्तन यात्रा ने सभी को भक्ति भाव में डूबा दिया। उसके बाद मंदिर के कृष्ण हॉल में कृष्ण बलराम मंदिर की ऐतिहासिक यादें साझा की गईं जो वहां के मंदिरों के महत्व को दर्शा रही थीं।
शाम को कृष्ण हॉल में सिद्धांत प्रभु द्वारा विशेष प्रस्तुति दी गई। उसके बाद श्री श्री कृष्णा बलराम इन वृंदावन नामक ड्रामा का मंचन हुआ जिसे तुलसी महारानी माताजी और कृष्णा प्रिया द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस नाटक में वृंदावन में श्रीकृष्णा और बलराम के अद्भुत और प्रेरणादायक जीवन के प्रसंगों को जीवंत रूप से दिखाया गया।
देवी शक्ति माता ने 1959 में श्रील प्रभुपाद से ली थी दीक्षा
आज से लगभग 53 वर्ष पहले 1972 में वृंदावन में इस्कॉन (इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कान्शियसनेस) के मंदिर की नींव रखी गई थी। पूरा कार्य इस्कॉन के संस्थापक श्रील प्रभुपाद के मार्गदर्शन में हुआ। जिनकी भक्ति और समर्पण की प्रेरणा ने दुनिया भर में लाखों लोगों के जीवन को बदल दिया।
देवी शक्ति माता ने इस अवसर पर कहा कि उन्होंने 1959 में श्रील प्रभुपाद से दीक्षा प्राप्त की थी जब उनकी आयु केवल 18 वर्ष थी। उन्होंने बताया कि प्रभुपाद जी के साथ यात्रा करते हुए उन्होंने अपने जीवन को इस्कॉन के प्रति समर्पित किया। 1972 में वृंदावन में इस्कॉन मंदिर की नींव रखी गई थी और तीन वर्षों के बाद 1975 में यह भव्य मंदिर तैयार हुआ।