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Mathura News: ब्रज के अनूठे संत थे,भक्तमाली, रोम-रोम में रची थी निकुंज भक्ति

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वृंदावन। ब्रज की धूल में भक्ति की ऐसी साधना भी हुई, जिसने भक्तमाल की कथा को जन-जन के हृदय तक पहुंचाया। पं. जगन्नाथ प्रसाद भक्तमाली जी इसी भक्ति परंपरा के ऐसे संत थे, जिनके लिए ब्रज का कण-कण और प्रिया-प्रियतम की निकुंज लीलाएं साक्षात अनुभूति थीं। उनकी स्मृति में 42वां त्रिदिवसीय प्रिया-प्रियतम मिलन महोत्सव मंगलवार को ज्ञानगूदड़ी स्थित श्री जानकी भवन में श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में शुरू हुआ।
महोत्सव के पहले दिन सुबह से ही भक्तमाली जी की साधना स्थली ताड़वाली कुंज में भजन-कीर्तन और भक्तमाल समाज के सामूहिक गायन से वातावरण भक्तिमय हो उठा। दोपहर में श्रद्धालुओं ने भक्तमाल की रसवर्षिणी कथा का श्रवण किया। इसके बाद जनकपुर से पधारी श्री सीताराम की झांकी के दर्शन और पद गायन ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। सायंकाल संतों ने भक्तमाली जी के चित्र का अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन और पूजन-अर्चन कर महोत्सव का विधिवत शुभारंभ किया। इसके बाद आयोजित संत-विद्वत संगोष्ठी में भक्तमाली जी के व्यक्तित्व और उनकी साधना को याद करते हुए संतों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। ब्रज के संत श्री गोरेलाल की कुंज के महंत किशोरदास महाराज ने कहा कि पं. जगन्नाथ प्रसाद भक्तमाली ब्रज के अनूठे और अद्भुत संत थे। ब्रजवास और प्रिया-प्रियतम की निकुंज लीलाओं की आंतरिक रसमय अनुभूति में वे सदैव डूबे रहते थे। सहचरी भाव से समर्पित उनका जीवन भक्ति की अनुपम मिसाल था।
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नाभा द्वाराचार्य महंत सुतीक्ष्णदास महाराज ने कहा कि मानव मात्र के कल्याण के लिए परमात्मा समय-समय पर संत रूप में आते हैं। मलूकपीठाधीश्वर राजेंद्र दास देवाचार्य महाराज ने धना भक्त के चरित्र के माध्यम से भक्तमाली जी को श्रद्धांजलि दी। महंत ब्रज बिहारी दास शास्त्री ने कहा कि भक्तमाली जी ब्रज के तात्विक स्वरूप से भली-भांति परिचित थे। उन्हें ब्रज के कण-कण में प्रभु का साक्षात्कार होता था। अयोध्या से आए नरहरिदास ने कहा कि भक्तमाली आध्यात्मिक क्रांति के संवाहक थे। उन्होंने भक्तमाल की प्रेरक, मर्मस्पर्शी और हृदयग्राही कथा के माध्यम से जन-जन को भक्ति का मार्ग दिखाया। इस अवसर पर मोहनदास, श्रीराम कृपालुदास, किशोरी शरण भक्तमाली औररामदास महाराज ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए। संतों ने भक्तमाली जी के पंच ग्रंथ स्तवक का विमोचन किया। संचालन श्रीराम संजीवन दास ने किया। पंडित रसिक शर्मा ने स्वागत और डॉ. अनूप शर्मा ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में देवेंद्र शर्मा, संजय शर्मा, विष्णुदान शर्मा, राजेश चंद्र शर्मा, मृदुल, अभिराज, यदु, वासु और जय सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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